लापता मामलों में एफआईआर अनिवार्य

लापता मामलों में एफआईआर अनिवार्य

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी पुलिस थानों को निर्देश दिया है कि किसी भी लापता बच्चे या व्यक्ति की शिकायत मिलने पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए। यह महत्वपूर्ण आदेश 22 मई 2026 को न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने जारी किया। अदालत का उद्देश्य लापता लोगों, विशेषकर बच्चों, की तलाश और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

एफआईआर दर्ज करने पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लापता बच्चे के मामले में पुलिस किसी प्रारंभिक जांच का इंतजार नहीं करेगी और तुरंत एफआईआर दर्ज करेगी। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की अपहरण से संबंधित धाराओं को शामिल करना अनिवार्य होगा। अदालत ने कहा कि पुलिस को शुरुआत से ही मामले को संभावित अपहरण या तस्करी के दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

लापता बच्चों के मामलों पर चिंता

अदालत ने देश में लगभग 47 हजार ऐसे बच्चों का उल्लेख किया जो अब तक खोजे नहीं जा सके हैं। कोर्ट ने कहा कि जब कोई बच्चा लापता होता है तो उसके अभिभावकों द्वारा निजी स्तर पर खोजबीन किए जाने की प्रतीक्षा नहीं की जानी चाहिए। पुलिस को शिकायत मिलते ही सक्रिय होकर कार्रवाई शुरू करनी होगी।

मानव तस्करी रोधी इकाइयों को मजबूत करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को चार सप्ताह के भीतर पूरी तरह कार्यशील बनाने का निर्देश दिया। ये विशेष पुलिस इकाइयां मानव तस्करी, अपहरण और बचाव कार्यों से जुड़े मामलों की जांच करती हैं। अदालत ने कहा कि इन इकाइयों की सक्रियता से बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा।

राष्ट्रीय डेटा ग्रिड बनाने का निर्देश

गृह मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि वह पूरे देश के सभी पुलिस थानों को जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय डेटा ग्रिड तैयार करे। इसके लिए मानव तस्करी, लापता बच्चों और लापता महिलाओं से संबंधित मामलों के लिए एक विशेष पोर्टल बनाया जाएगा। इससे राज्यों के बीच सूचना साझा करने और जांच प्रक्रिया को तेज करने में सहायता मिलेगी।

मानक संचालन प्रक्रिया तैयार होगी

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। यह समिति लापता बच्चों के मामलों के लिए पूरे देश में लागू होने वाली मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि बरामद किए गए बच्चों और व्यक्तियों का आधार सत्यापन कराया जाए या उन्हें आधार कार्ड जारी किया जाए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायिक संस्थान है। ” संज्ञेय अपराध में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है। ” भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लिया है। ” एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स मानव तस्करी से जुड़े मामलों की जांच और बचाव कार्य करती हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश लापता बच्चों और मानव तस्करी के मामलों में बड़ी कानूनी और प्रशासनिक पहल माना जा रहा है। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी और पीड़ितों की खोज व सुरक्षा प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

Originally written on May 23, 2026 and last modified on May 23, 2026.

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