रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण, भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मिली मजबूती
भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायुसेना ने 2 जून 2026 को स्वदेशी रूप से विकसित रुद्रम-II एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से प्रक्षेपित की गई और निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदने में सक्षम रही। इस उपलब्धि को भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और उन्नत सैन्य तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परीक्षण की सफलता ने यह साबित किया है कि भारत आधुनिक सटीक प्रहार (प्रिसिजन स्ट्राइक) क्षमताओं से लैस स्वदेशी हथियार प्रणालियों के विकास में लगातार प्रगति कर रहा है।
रुद्रम-II मिसाइल की विशेषताएं
रुद्रम-II एक स्वदेशी ठोस ईंधन (सॉलिड-प्रोपेल्ड) आधारित एयर-लॉन्च्ड मिसाइल प्रणाली है। इसे विशेष रूप से वायु से सतह पर स्थित दुश्मन के लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह मिसाइल उच्च सटीकता के साथ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, रडार प्रणालियों और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। एयर-टू-सर्फेस मिसाइल होने के कारण इसे लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जाता है और यह भूमि अथवा समुद्री सतह पर मौजूद लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए उपयोग की जाती है। इसकी आधुनिक तकनीक भारतीय वायुसेना की आक्रामक क्षमता को और मजबूत बनाती है।
कठिन परिस्थितियों में हुआ परीक्षण
रुद्रम-II का परीक्षण अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया गया। मिसाइल को कठिन रिलीज स्थितियों और महत्वपूर्ण उड़ान पथ (क्रिटिकल ट्रैजेक्टरी) के अंतर्गत लॉन्च किया गया, ताकि इसकी वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके। ओडिशा स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज), चांदीपुर में मौजूद उन्नत उपकरणों द्वारा उड़ान संबंधी आंकड़े एकत्र किए गए। इन आंकड़ों के विश्लेषण से मिसाइल के सभी महत्वपूर्ण उपप्रणालियों और तकनीकी घटकों के सफल प्रदर्शन की पुष्टि हुई।
विकास में डीआरडीओ की भूमिका
रुद्रम-II परियोजना का नेतृत्व हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने किया, जो डीआरडीओ की प्रमुख प्रयोगशालाओं में से एक है। इस परियोजना में डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के साथ-साथ रक्षा उद्योग से जुड़े साझेदारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह मिसाइल कार्यक्रम भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा
रुद्रम-II का सफल परीक्षण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत सरकार लंबे समय से रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी विकास और उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी रक्षा उद्योग को सशक्त बनाना है। इस सफलता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की रक्षा शक्ति और तकनीकी क्षमता में वृद्धि का प्रतीक बताया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रुद्रम-II एक एयर-टू-सर्फेस मिसाइल है, जिसे विमान से प्रक्षेपित कर भूमि या समुद्री लक्ष्यों पर हमला किया जाता है।
- सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का ट्विन-सीट, ट्विन-इंजन बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है।
- इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर), चांदीपुर, ओडिशा भारत की प्रमुख मिसाइल परीक्षण सुविधाओं में से एक है।
- डीआरडीओ भारत के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला प्रमुख रक्षा अनुसंधान संगठन है।
रुद्रम-II मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की सैन्य तकनीक और स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता की एक बड़ी उपलब्धि है। यह न केवल भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगा। भविष्य में ऐसे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का विकास भारत की रणनीतिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।