राष्ट्रमंडल जूडो में भारत का ऐतिहासिक स्वर्ण

राष्ट्रमंडल जूडो में भारत का ऐतिहासिक स्वर्ण

ग्लास्गो में 31 जुलाई 2026 का दिन भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पहले जूडो स्वर्ण पदक जीत लिए। स्कॉटलैंड के स्कॉटिश इवेंट कैंपस (SEC) में हुए मुकाबलों में इन दोनों खिलाड़ियों ने न सिर्फ पदक जीते, बल्कि भारत के जूडो इतिहास में नया अध्याय भी जोड़ दिया।

अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा में रचा इतिहास

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग के फाइनल में कनाडा की हेडी क्वाच को गोल्डन स्कोर मुकाबले में 2-1 से हराया। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इससे पहले भारत ने इस खेल में कई बार पदक जीते थे, लेकिन स्वर्ण की कमी बनी हुई थी।

हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा में दिखाया दबदबा

पुरुष 60 किग्रा वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज़ को 10-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत वाज़ा-आरी के आधार पर आई और हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। 23 वर्षीय हर्ष का यह पहला राष्ट्रमंडल खेल था, और उन्होंने अपने पदार्पण को यादगार बना दिया।

भारत के जूडो सफर में क्यों अहम है यह उपलब्धि

राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो को 1990 से शामिल किया गया है। 31 जुलाई 2026 से पहले तक भारत ने इस मंच पर जूडो में 11 पदक जीते थे, जिनमें पांच रजत और छह कांस्य शामिल थे, लेकिन स्वर्ण नहीं आया था। ऐसे में अस्मिता और हर्ष की जीत भारत के लिए लंबे इंतजार का अंत है। उसी दिन यामिनी मौर्य ने भी महिला 57 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता, हालांकि फाइनल में उन्हें इंग्लैंड की एसेल्या टॉपरेक से हार मिली।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जूडो एक जापानी मार्शल आर्ट और कॉम्बैट स्पोर्ट है, जिसमें थ्रो, पिन, जॉइंट लॉक और चोकहोल्ड का उपयोग होता है।
  • गोल्डन स्कोर जूडो में टाई होने पर दिया जाने वाला अतिरिक्त समय होता है, जिसमें अगला अंक मुकाबला तय करता है।
  • वाज़ा-आरी जूडो की स्कोरिंग प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंक है, जो इप्पोन से नीचे माना जाता है।
  • राष्ट्रमंडल खेल राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों का बहु-खेल आयोजन है।

इन दो स्वर्ण पदकों ने भारतीय जूडो को नई पहचान दी है और यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में इस खेल में देश की संभावनाओं को और मजबूत करती दिखती है।

Originally written on August 1, 2026 and last modified on August 1, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *