राज्यों की उधारी में अनुशासन पर आरबीआई का जोर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने राज्यों से उधारी को जिम्मेदारी से लेने, खर्च की गुणवत्ता सुधारने और सरकारी नकदी का बेहतर प्रबंधन करने का आग्रह किया। उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित राज्यों के वित्त सचिवों के 36वें सम्मेलन में यह बात कही। सम्मेलन का विषय राज्यों की वित्तीय स्थिरता बढ़ाने में गुणवत्तापूर्ण खर्च, प्रभावी नकदी प्रबंधन और विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन की भूमिका था।
वित्तीय स्थिरता के लिए उधारी और खर्च में संतुलन
राज्य सरकारें विकास कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए उधार लेती हैं, लेकिन इससे सार्वजनिक ऋण और भविष्य में ब्याज तथा मूलधन चुकाने की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। इसलिए उधारी की योजना ऐसी होनी चाहिए कि मौजूदा जरूरतें पूरी हों और आने वाले वर्षों में वित्तीय दबाव असहनीय न बने। वित्तीय स्थिरता का अर्थ है कि सरकार समय के साथ अपने खर्च और ऋण संबंधी दायित्वों को पूरा कर सके।
मल्होत्रा ने खर्च की गुणवत्ता पर भी जोर दिया। इसका आशय केवल बजट खर्च करने से नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने से है कि सार्वजनिक धन निर्धारित उद्देश्यों और प्रभावी परिणामों तक पहुंचे। सम्मेलन में राज्यों की बाजार से उधारी, आरबीआई से अल्पकालिक वित्तीय सहायता और बेंचमार्क निर्गम रणनीति की समीक्षा की गई। इस रणनीति में तय अवधि वाले मानक ऋण-पत्र नियमित रूप से जारी किए जाते हैं, जिससे उधारी का ढर्रा अधिक व्यवस्थित हो सकता है।
नकदी प्रबंधन और डिजिटल वित्तीय साधन
सरकारी नकदी प्रबंधन में प्राप्तियों और भुगतानों का समयबद्ध आकलन शामिल है। इससे सरकारें अपने दायित्व समय पर पूरा कर सकती हैं और आय-व्यय के बीच अस्थायी अंतर को संभाल सकती हैं। मल्होत्रा ने राज्यों को विवेकपूर्ण उधारी के साथ नकदी प्रबंधन को बेहतर बनाने की सलाह दी। उन्होंने राज्य सरकारों के नकदी और ऋण प्रबंधन से जुड़ी अवधारणाओं, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणालियों पर आधारित एक संकलन भी जारी किया।
उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) मंच का प्रभावी उपयोग करने को कहा। इस मंच पर बैंक, सरकारी विभाग और अन्य संबंधित पक्ष राज्य स्तर के बैंकिंग मामलों में समन्वय करते हैं। राज्यों को एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। यह प्रासंगिक वित्तीय जानकारी साझा करके ऋण तक पहुंच आसान बनाने के लिए बनाया गया डिजिटल मंच है।
लाभ हस्तांतरण में प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा
मल्होत्रा ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के लिए प्रोग्रामेबल केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (पी-सीबीडीसी) के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल धन है; इसके प्रोग्रामेबल स्वरूप में उपयोग की कुछ शर्तें निर्धारित की जा सकती हैं। सम्मेलन में 27 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त सचिवों के साथ केंद्रीय वित्त मंत्रालय, महालेखा नियंत्रक और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संविधान का अनुच्छेद 293 राज्यों की उधारी से संबंधित है।
- अनुच्छेद 293(3) के तहत, केंद्र के ऋण या गारंटी बकाया होने पर राज्य को नया ऋण लेने के लिए केंद्र सरकार की सहमति की आवश्यकता हो सकती है।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत 1 अप्रैल 1935 को कामकाज शुरू किया था।
- आरबीआई का राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ। इसका मुख्यालय मुंबई में है।
राज्यों के लिए चुनौती विकास की जरूरतों को पूरा करते हुए ऋण और नकदी पर नियंत्रण बनाए रखने की है। बेहतर खर्च योजना और नियमित उधारी व्यवस्था इस संतुलन को मजबूत कर सकती है।