नियमों में राहत से कारोबार के लिए भरोसेमंद माहौल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कारोबार से जुड़ी 47,957 अनुपालन आवश्यकताओं को कम किया है। 27 अक्टूबर 2026 तक की इस पहल में नियमों का डिजिटलीकरण, सरलीकरण, कुछ प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाना और अनावश्यक आवश्यकताओं को समाप्त करना शामिल है। इसका उद्देश्य कारोबारियों के लिए प्रक्रियाओं का बोझ घटाना और नियमों के पालन को अधिक सुगम बनाना है।
अनुपालन सुधारों में डिजिटलीकरण पर जोर
कुल 47,957 कम की गई आवश्यकताओं में से 22,290 का डिजिटलीकरण किया गया है, जबकि 16,141 को सरल बनाया गया है। इसके अलावा 5,255 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया गया और 4,271 आवश्यकताओं को समाप्त किया गया। ये कदम अलग-अलग स्तरों पर कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की कोशिश का हिस्सा हैं। डिजिटलीकरण से कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा सकती हैं, जबकि सरलीकरण और समाप्ति से नियमों के अनुपालन में लगने वाला समय और प्रयास घटाने का लक्ष्य है।
जन विश्वास कानूनों से छोटे उल्लंघनों पर राहत
जन विश्वास कानूनों के तहत केंद्रीय कानूनों के 900 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। इनमें 2023 में 42 कानूनों के 183 प्रावधान और 2026 में 79 कानूनों के 717 प्रावधान शामिल हैं। इसका जोर कुछ उल्लंघनों के लिए आपराधिक कार्रवाई के बजाय अनुपालन को बढ़ावा देने पर है।
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025 को 18 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें 10 मंत्रालयों और विभागों के अधीन 16 केंद्रीय कानूनों के 288 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाने और 67 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है। विधेयक के प्रस्तावों को लागू कानूनों से अलग समझना जरूरी है।
स्टार्टअप, निवेश और मंजूरियों की तस्वीर
27 अक्टूबर 2026 तक डीपीआईआईटी ने 2,50,046 स्टार्टअप को मान्यता दी थी। इनसे 770 से अधिक जिलों और 56 उद्योग क्षेत्रों में 25.42 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा हुए हैं। स्टार्टअप के लिए ऋण गारंटी योजना के तहत 532 ऋणों को 1,662.71 करोड़ रुपये की गारंटी मिली। प्रति उधारकर्ता अधिकतम गारंटी सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये की गई है। 27 चैंपियन क्षेत्रों के लिए वार्षिक शुल्क घटाकर 1 प्रतिशत किया गया है।
वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच भारत में कुल 843 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। वित्त वर्ष 2025-26 में निवेश प्रवाह 94.53 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से 20 नवंबर 2025 तक 11,75,435 आवेदनों में से 8,29,750 को मंजूरी दी गई थी। यह कारोबार संबंधी मंजूरियों के लिए एक डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है।
- जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया गया था।
- राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली कारोबार से जुड़ी मंजूरियों के लिए डिजिटल व्यवस्था है।
- विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत की रैंक 2014 के 142वें स्थान से 2019 में 63वें स्थान पर पहुंची थी।
अनुपालन में कटौती, स्टार्टअप वित्त तक पहुंच और डिजिटल मंजूरियां कारोबार के लिए प्रक्रियागत बाधाएं घटाने की व्यापक नीति को दर्शाती हैं।