राजस्थान के जैनेंद्र के. जैन को मिला वुल्फ पुरस्कार 2025
राजस्थान में जन्मे प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी जैनेंद्र के. जैन को वर्ष 2025 का वुल्फ पुरस्कार (भौतिकी) प्रदान किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें कंपोजिट फर्मियॉन (Composite Fermions) की खोज के लिए दिया गया, जिसने फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल प्रभाव की वैज्ञानिक समझ को नई दिशा दी। पुरस्कार समारोह 18 जून 2026 को इजराइल की संसद नेसेट में आयोजित किया गया, जहां इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह उपलब्धि न केवल जैनेंद्र के. जैन के लिए बल्कि भारतीय मूल के वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी गौरव का विषय है। उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में वुल्फ पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति के रूप में भी जाना जाएगा।
वुल्फ पुरस्कार का महत्व
वुल्फ पुरस्कार भौतिकी के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। इसकी स्थापना 1978 में वुल्फ फाउंडेशन द्वारा की गई थी। यह पुरस्कार विज्ञान और कला के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। भौतिकी के क्षेत्र में वुल्फ पुरस्कार को अक्सर नोबेल पुरस्कार का अग्रदूत माना जाता है। अब तक वुल्फ पुरस्कार प्राप्त कर चुके 27 वैज्ञानिक बाद में नोबेल पुरस्कार भी जीत चुके हैं। यही कारण है कि इस सम्मान को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।
कंपोजिट फर्मियॉन की खोज और वैज्ञानिक योगदान
जैनेंद्र के. जैन ने वर्ष 1989 में येल विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता के रूप में कार्य करते हुए कंपोजिट फर्मियॉन की अवधारणा प्रस्तुत की थी। कंपोजिट फर्मियॉन ऐसे क्वासिपार्टिकल होते हैं, जिनका उपयोग मजबूत सहसंबद्ध इलेक्ट्रॉन प्रणालियों के अध्ययन में किया जाता है। यह सिद्धांत फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल प्रभाव की व्याख्या में केंद्रीय भूमिका निभाता है। फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल प्रभाव एक महत्वपूर्ण क्वांटम घटना है, जिसे अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र में स्थित द्वि-आयामी इलेक्ट्रॉन प्रणालियों में देखा जाता है। जैन के सिद्धांत ने इस जटिल घटना को समझने के लिए एक प्रभावशाली और व्यापक रूप से स्वीकार किया गया ढांचा प्रदान किया।
जैनेंद्र के. जैन का शैक्षणिक सफर
जैनेंद्र के. जैन वर्तमान में अमेरिका के पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में इवान प्यू यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और एबरली फैमिली चेयर इन फिजिक्स के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा वे भारत में स्थापित लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट के संस्थापक निदेशक भी हैं। उन्होंने वर्ष 2025 का वुल्फ पुरस्कार भौतिक विज्ञानी जेम्स पी. आइजनस्टीन और मोर्देहाई हाइब्लम के साथ साझा किया। इन तीनों वैज्ञानिकों के कार्यों ने क्वांटम हॉल भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आधुनिक भौतिकी में योगदान
क्वांटम हॉल प्रभाव और उससे जुड़े सिद्धांत आधुनिक संघनित पदार्थ भौतिकी के महत्वपूर्ण शोध क्षेत्रों में शामिल हैं। इन अध्ययनों ने न केवल मूलभूत विज्ञान को आगे बढ़ाया है, बल्कि भविष्य की क्वांटम तकनीकों, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास के लिए भी आधार तैयार किया है। जैनेंद्र के. जैन का कार्य यह दर्शाता है कि सैद्धांतिक विज्ञान में नई अवधारणाएं किस प्रकार जटिल प्राकृतिक घटनाओं को समझने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वुल्फ पुरस्कार की स्थापना 1978 में वुल्फ फाउंडेशन द्वारा की गई थी।
- फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल प्रभाव द्वि-आयामी इलेक्ट्रॉन प्रणालियों में देखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण क्वांटम प्रभाव है।
- कंपोजिट फर्मियॉन की अवधारणा जैनेंद्र के. जैन ने वर्ष 1989 में प्रस्तुत की थी।
- अब तक 27 वुल्फ पुरस्कार विजेता बाद में नोबेल पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।
जैनेंद्र के. जैन को मिला वुल्फ पुरस्कार 2025 भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की वैश्विक उपलब्धियों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी खोज ने क्वांटम भौतिकी की समझ को गहराई प्रदान की है और आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिकों को प्रेरित करने का कार्य करेगी। यह सम्मान विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करता है।