रबी सीजन से पहले KRIBHCO की खाद आयात रणनीति
रबी सीजन की तैयारी के बीच कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (KRIBHCO) ने गैर-यूरिया उर्वरकों के बड़े आयात की योजना बनाई है। सहकारी संस्था अक्टूबर से शुरू होने वाले रबी मौसम के लिए 3 से 4 लाख टन फॉस्फेटिक और मिश्रित उर्वरक मंगाने की तैयारी कर रही है, ताकि गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी फसलों के लिए समय पर आपूर्ति बनी रहे।
रबी फसलों के लिए क्यों अहम है यह कदम
रबी मौसम में फसल पोषण के लिए यूरिया के साथ-साथ डीएपी और एनपीके जैसे गैर-यूरिया उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है। डीएपी में फॉस्फोरस और नाइट्रोजन होते हैं, जबकि एनपीके उर्वरक नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का संतुलित मिश्रण देते हैं। इन उर्वरकों का उपयोग बुवाई के शुरुआती चरण में पौधों की जड़ और बढ़वार के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
KRIBHCO की मौजूदा आपूर्ति और आयात योजना
KRIBHCO के चेयरमैन वी. सुधाकर चौधरी ने सहकारी संस्था की 46वीं वार्षिक आम बैठक में यह योजना साझा की। प्रबंध निदेशक एस.एस. यादव के अनुसार, संस्था पहले ही 8 लाख टन डीएपी और 1 लाख टन अन्य एनपीके उर्वरकों का आयात कर चुकी है। इसके अलावा अगले दो से तीन महीनों में 3 लाख टन और आयात करने की योजना है। संस्था के पास इस मौसम के लिए 6 लाख टन का मौजूदा स्टॉक भी बताया गया है।
कीमतें, आपूर्ति और बाजार पर असर
वैश्विक बाजार में डीएपी की कीमत लगभग 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन और एनपीके की कीमत लगभग 915 अमेरिकी डॉलर प्रति टन बताई गई है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की आयात लागत और घरेलू उपलब्धता पर पड़ता है। भारत में फॉस्फेटिक और पोटैशिक उर्वरकों की बड़ी जरूरत आयात से पूरी होती है, क्योंकि घरेलू उत्पादन सीमित है। ऐसे में सहकारी संस्थाओं की समय पर खरीद और भंडारण व्यवस्था रबी सीजन में आपूर्ति स्थिर रखने में मदद करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डीएपी का पूरा नाम Di-Ammonium Phosphate है और यह एक प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है।
- एनपीके उर्वरकों में तीन मुख्य पोषक तत्व होते हैं: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम।
- रबी फसलें आमतौर पर सर्दियों में बोई जाती हैं; गेहूं, सरसों, चना और जौ इसकी प्रमुख फसलें हैं।
- KRIBHCO एक बहु-राज्य सहकारी संस्था है, जो उर्वरक उत्पादन, विपणन और वितरण से जुड़ी है।
कुल मिलाकर, KRIBHCO की यह योजना रबी सीजन में उर्वरक उपलब्धता बनाए रखने और किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।