भारत-जीसीसी एफटीए वार्ता से खाड़ी व्यापार को नई गति
भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में इस संबंध में संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए गए। यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच व्यापार, ऊर्जा और निवेश संबंध पहले से ही बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वार्ता की औपचारिक शुरुआत
संयुक्त बयान पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और जीसीसी के महासचिव जसिम मोहम्मद अलबुदैवी ने हस्ताक्षर किए। इससे पहले 5 फरवरी 2026 को एफटीए के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसने बातचीत की रूपरेखा तय की। अब दोनों पक्ष व्यापार समझौते के दायरे, प्राथमिकताओं और संवेदनशील मुद्दों पर आगे चर्चा करेंगे।
जीसीसी क्यों है भारत के लिए अहम
जीसीसी पश्चिम एशिया के छह अरब देशों का एक क्षेत्रीय राजनीतिक और आर्थिक समूह है। इसके सदस्य बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हैं। इस संगठन की स्थापना 1981 में हुई थी और इसका मुख्यालय सऊदी अरब की राजधानी रियाद में है। भारत के लिए यह समूह इसलिए खास है क्योंकि यह उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार ब्लॉक है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.68 अरब डॉलर रहा। खाड़ी क्षेत्र से भारत को कच्चा तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मिलता है, जबकि भारत से पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, खाद्य उत्पाद और सेवाएं निर्यात होती हैं।
एफटीए से क्या बदल सकता है
मुक्त व्यापार समझौता दो या अधिक अर्थव्यवस्थाओं के बीच ऐसा करार होता है, जिसमें चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क घटाए या हटाए जाते हैं। इसके साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, निवेश, बौद्धिक संपदा और विवाद निपटान जैसे विषय भी शामिल होते हैं। भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदारों के साथ एफटीए कर चुका है।
भारत-जीसीसी एफटीए से व्यापार लागत घटने, बाजार पहुंच बढ़ने और निवेश प्रवाह को गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ डिजिटल व्यापार और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे नए क्षेत्रों पर भी बातचीत होने की संभावना है, जो आधुनिक व्यापार समझौतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
बातचीत की मौजूदा स्थिति
पश्चिम एशिया में संकट के कारण जून 2026 में यह प्रक्रिया कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई थी। इसके बाद 23 अगस्त 2026 को भारत के सऊदी अरब स्थित राजदूत विपुल और जीसीसी महासचिव जसिम मोहम्मद अलबुदैवी ने रियाद में बातचीत की, जिसमें वार्ता की समीक्षा और मंत्रीस्तरीय बैठक की तैयारी पर चर्चा हुई। परिस्थितियां अनुकूल रहने पर सितंबर 2026 में भौतिक वार्ता शुरू होने की संभावना जताई गई थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जीसीसी की स्थापना 1981 में हुई थी और इसमें छह सदस्य देश शामिल हैं।
- जीसीसी का मुख्यालय रियाद, सऊदी अरब में स्थित है।
- भारत-जीसीसी एफटीए के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर 5 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर हुए थे।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-जीसीसी व्यापार 178.56 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भारत और जीसीसी के बीच एफटीए वार्ता आगे बढ़ती है तो यह न केवल व्यापारिक संबंधों को गहराई देगी, बल्कि ऊर्जा, निवेश और सेवाओं के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलेगी।