एफसीवी तंबाकू किसानों को 50,000 रुपये की ब्याज-मुक्त सहायता
केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के फ्ल्यू-क्योरड वर्जीनिया यानी एफसीवी तंबाकू उत्पादकों के लिए प्रति बार्न 50,000 रुपये का एकमुश्त ब्याज-मुक्त ऋण मंजूर किया है। यह सहायता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ब्याज-मुक्त कार्यशील पूंजी सहायता योजना के तहत दी जाएगी और इससे लगभग 44,000 किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए राहत का वित्तीय ढांचा
सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है जब तंबाकू उत्पादक किसानों को फसल तैयार करने, घरेलू जरूरतें पूरी करने और पुराने संस्थागत कर्ज चुकाने के लिए अतिरिक्त नकदी की आवश्यकता होती है। प्रति बार्न 50,000 रुपये की यह सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए भेजी जाएगी। इस पूरी व्यवस्था पर लगभग 220 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।
यह सहायता अल्पकालिक कार्यशील पूंजी के रूप में दी जा रही है, ताकि किसान निजी उधारी पर निर्भरता कम कर सकें और अगली फसल के लिए जरूरी इनपुट खरीद सकें।
एफसीवी तंबाकू और आंध्र प्रदेश की भूमिका
एफसीवी तंबाकू एक व्यावसायिक किस्म है, जिसे नियंत्रित तापमान और वायु प्रवाह वाले बार्न में सुखाया जाता है। यह किस्म निर्यातोन्मुख मानी जाती है और भारत में इसके उत्पादन में आंध्र प्रदेश की अहम हिस्सेदारी है। इस फसल की बिक्री तंबाकू बोर्ड द्वारा विनियमित नीलामी मंचों के माध्यम से होती है, जिससे कीमत और खरीद प्रक्रिया पर निगरानी बनी रहती है।
2025-26 के एफसीवी तंबाकू सीजन की नीलामी 25 मार्च 2026 से शुरू हुई थी। 25 सितंबर 2026 तक लगभग 100 मिलियन किलोग्राम एफसीवी तंबाकू की नीलामी हो चुकी थी। इसी अवधि में केंद्र ने आंध्र प्रदेश में तंबाकू बोर्ड के नीलामी मंचों के जरिए अतिरिक्त और अनधिकृत एफसीवी तंबाकू की बिक्री की भी अनुमति दी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एफसीवी का पूरा नाम फ्ल्यू-क्योरड वर्जीनिया है, जो नियंत्रित गर्मी और वायु प्रवाह में सुखाई जाने वाली तंबाकू किस्म है।
- तंबाकू बोर्ड वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
- कार्यशील पूंजी सहायता का उपयोग सामान्यतः खेती से जुड़े तात्कालिक खर्चों और अगली फसल की तैयारी में किया जाता है।
यह फैसला तंबाकू किसानों के लिए नकदी प्रवाह मजबूत करने और बिक्री व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीलामी मंचों के जरिए बिक्री और सीधे बैंक खाते में सहायता, दोनों कदम किसानों की आर्थिक अनिश्चितता कम करने में मदद कर सकते हैं।