पीएलआई योजनाओं से निवेश, उत्पादन और रोजगार को मिली रफ्तार
भारत सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई योजनाओं के तहत 2020 में शुरुआत के बाद से 30 जून 2026 तक कुल ₹36,754 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी की गई है। यह आंकड़ा उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 25 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया। इन योजनाओं का उद्देश्य कंपनियों को अधिक उत्पादन, बिक्री और निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिले और निर्यात बढ़े।
पीएलआई योजना का ढांचा और दायरा
पीएलआई योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख औद्योगिक प्रोत्साहन व्यवस्था है, जिसे 2020 में शुरू किया गया था। यह 14 क्षेत्रों को कवर करती है और इसके लिए ₹1.91 लाख करोड़ का अनुमोदित परिव्यय तय किया गया है। योजना की खासियत यह है कि प्रोत्साहन सीधे उत्पादन या निवेश के प्रदर्शन से जुड़ा होता है, जिससे कंपनियों को वास्तविक विस्तार के लिए प्रेरणा मिलती है।
किन क्षेत्रों को मिला सबसे अधिक लाभ
क्षेत्रवार वितरण में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सबसे आगे रहा, जिसे जून 2026 तक ₹19,090.98 करोड़ मिले। इसके बाद दवा क्षेत्र को ₹6,662 करोड़, खाद्य उत्पादों को ₹3,271.44 करोड़ और ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट्स को ₹3,174.15 करोड़ की प्रोत्साहन राशि दी गई। यह रुझान बताता है कि सरकार का जोर उन क्षेत्रों पर रहा है जिनमें निर्यात, मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन की बड़ी संभावना है।
निवेश, उत्पादन और रोजगार पर असर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएलआई योजनाओं के तहत 30 जून 2026 तक वास्तविक निवेश ₹2.58 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इन योजनाओं से ₹23.79 लाख करोड़ का उत्पादन और बिक्री हुई, जबकि निर्यात ₹15.53 लाख करोड़ तक दर्ज किया गया। रोजगार के मोर्चे पर भी इन योजनाओं ने 14.57 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पीएलआई योजना की शुरुआत 2020 में की गई थी।
- यह योजना 14 क्षेत्रों को कवर करती है और इसका अनुमोदित परिव्यय ₹1.91 लाख करोड़ है।
- जून 2026 तक सबसे अधिक प्रोत्साहन बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को मिला।
- पीएलआई योजनाओं से ₹15.53 लाख करोड़ का निर्यात और 14.57 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई हैं।
कुल मिलाकर, पीएलआई योजनाएं भारत में उत्पादन-आधारित औद्योगिक नीति का अहम उपकरण बनकर उभरी हैं। इनसे निवेश, निर्यात और रोजगार तीनों मोर्चों पर ठोस परिणाम सामने आए हैं।