मिस्र-चीन हवाई अभ्यास से बढ़ी सैन्य साझेदारी की चर्चा
मिस्र और चीन के बीच अगस्त 2026 में शुरू हुआ संयुक्त हवाई अभ्यास ‘ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026’ दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का संकेत माना जा रहा है। इस अभ्यास में चीनी पीएलए वायु सेना के जे-16 लड़ाकू विमान, ईंधन भरने वाले विमान, विशेष मिशन विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हुए, जो चीन से लगभग 6,000 किलोमीटर की उड़ान भरकर मिस्र के एयरबेस पहुंचे।
दूसरी बार साथ आए मिस्र और चीन
मिस्र के सशस्त्र बलों ने 22 अगस्त 2026 को इस अभ्यास की शुरुआत की घोषणा की। यह दोनों देशों के बीच दूसरा द्विपक्षीय हवाई अभ्यास है। पिछले वर्ष हुए अभ्यास की तुलना में इस बार चीन ने अधिक भारी और उन्नत जे-16 फाइटर जेट तैनात किए, जबकि मिस्र की ओर से फ्रांसीसी निर्मित डसॉल्ट राफेल विमान प्रशिक्षण में शामिल हुए।
अभ्यास का सबसे अहम हिस्सा पहले दिन हुआ, जब जे-16 और राफेल के बीच एक-से-एक हवाई मुकाबले जैसे ड्रिल कराए गए। ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य केवल युद्धक क्षमता दिखाना नहीं, बल्कि पायलटों की प्रतिक्रिया, समन्वय और हवाई स्थिति में निर्णय लेने की क्षमता को परखना भी होता है।
तकनीकी ब्रीफिंग और उड़ान सुरक्षा पर जोर
उड़ान प्रशिक्षण शुरू होने से पहले दोनों देशों के पायलटों ने तकनीकी ब्रीफिंग में हिस्सा लिया। इसमें उड़ान सुरक्षा, हवाई क्षेत्र नियंत्रण और आपातकालीन प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। संयुक्त अभ्यासों में यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि अलग-अलग देशों के विमान, संचार प्रणाली और ऑपरेशनल नियम कई बार भिन्न होते हैं।
24 अगस्त 2026 को पीएलए वायु सेना ने कॉकपिट वीडियो भी जारी किया, जिसमें प्रशिक्षण के दौरान नजदीकी युद्धाभ्यास और समन्वित उड़ान के दृश्य दिखे। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि अभ्यास का फोकस उच्च-स्तरीय हवाई युद्ध कौशल और वास्तविक परिस्थितियों जैसी ट्रेनिंग पर था।
रणनीतिक संदेश और रक्षा सहयोग का विस्तार
मिस्र लंबे समय से विभिन्न देशों के साथ रक्षा सहयोग के जरिए सैन्य प्रशिक्षण और खरीद दोनों में विविधता बनाए रखने की नीति अपनाता रहा है। चीन के साथ यह अभ्यास उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। दूसरी ओर, चीन भी ऐसे अभ्यासों के जरिए अपनी वायु शक्ति, लंबी दूरी की तैनाती क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सैन्य साझेदारी को प्रदर्शित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जे-16 चीन का ट्विन-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे पीएलए वायु सेना उपयोग करती है।
- डसॉल्ट राफेल फ्रांस में निर्मित मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे मिस्र की वायु सेना संचालित करती है।
- मिस्र और चीन ने अगस्त 2026 में अपना दूसरा द्विपक्षीय हवाई अभ्यास किया।
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों में एयर-टू-एयर कॉम्बैट ड्रिल्स, तकनीकी ब्रीफिंग और उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल सामान्य रूप से शामिल होते हैं।
कुल मिलाकर, ‘ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026’ केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिस्र-चीन रक्षा संबंधों की गहराई और आधुनिक हवाई युद्ध क्षमताओं के प्रदर्शन का मंच भी है।