माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री और स्केलेटल एडिटिंग ने रसायन विज्ञान में खोले नए रास्ते

माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री और स्केलेटल एडिटिंग ने रसायन विज्ञान में खोले नए रास्ते

आधुनिक रसायन विज्ञान में नई तकनीकों के विकास ने जटिल अणुओं के निर्माण और संशोधन को पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी बना दिया है। ऐसी ही दो महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री और स्केलेटल एडिटिंग। जून 2026 में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), तिरुपति के वैज्ञानिकों ने माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री का उपयोग करते हुए बिना किसी उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) के स्केलेटल एडिटिंग का सफल प्रदर्शन किया। इस शोध ने हरित रसायन विज्ञान और औषधि विकास के क्षेत्र में नई संभावनाएं उत्पन्न की हैं।

माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री क्या है?

माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें अत्यंत छोटे तरल कणों या बूंदों का उपयोग किया जाता है। ये बूंदें माइक्रोमीटर या नैनोमीटर स्तर की होती हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इन सूक्ष्म बूंदों में होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं सामान्य घोलों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो सकती हैं। जून 2026 में आईआईएसईआर तिरुपति के प्रोफेसर शिबदास बनर्जी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने जल माइक्रोड्रॉपलेट्स का उपयोग करके बिना किसी उत्प्रेरक के स्केलेटल एडिटिंग की। इस प्रक्रिया में एनिलीन को सीधे पाइरीडीन में परिवर्तित किया गया। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्यतः ऐसी प्रतिक्रियाओं के लिए विशेष उत्प्रेरकों और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसी अवधि में पर्ड्यू विश्वविद्यालय के रसायनज्ञ ग्राहम कुक्स और एस्टन लैब्स के शोधकर्ताओं ने भी माइक्रोड्रॉपलेट आधारित तकनीक विकसित की, जिससे बिना उच्च तापमान और उत्प्रेरकों के रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज किया जा सका।

स्केलेटल एडिटिंग क्या है?

स्केलेटल एडिटिंग कार्बनिक रसायन विज्ञान की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें किसी अणु की मूल संरचना या ढांचे (मॉलिक्यूलर स्कैफोल्ड) को बदला जाता है। इसमें केवल बाहरी समूहों में परिवर्तन नहीं किया जाता, बल्कि अणु के मुख्य रिंग तंत्र में परमाणुओं को जोड़ा, हटाया या प्रतिस्थापित किया जाता है। इस प्रक्रिया के प्रमुख रूपों में शामिल हैं—

  • परमाणु का समावेशन (Atom Insertion)
  • परमाणु का निष्कासन (Atom Deletion)
  • रिंग विस्तार (Ring Expansion)
  • रिंग संकुचन (Ring Contraction)
  • हेटरोएटम प्रतिस्थापन (Heteroatom Replacement)

इन तकनीकों का उपयोग नई औषधियों के विकास और जटिल कार्बनिक यौगिकों के संशोधन में किया जाता है।

औषधि विकास में महत्व

स्केलेटल एडिटिंग का सबसे बड़ा उपयोग दवा अनुसंधान में देखा जा रहा है। नाइट्रोजन युक्त हेटरोसाइक्लिक यौगिक जैसे पाइरीडीन और क्विनोलिन आधुनिक औषधियों के महत्वपूर्ण घटक हैं। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा वर्ष 2013 से 2023 के बीच स्वीकृत 80 प्रतिशत से अधिक लघु-अणु दवाओं में नाइट्रोजन युक्त हेटरोसाइक्लिक संरचनाएं मौजूद थीं। इसलिए वैज्ञानिक सरल यौगिकों से इन जटिल संरचनाओं को तैयार करने के लिए स्केलेटल एडिटिंग तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।

हाल के महत्वपूर्ण शोध

हाल के वर्षों में स्केलेटल एडिटिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मार्च 2026 में रिचमंड सारपोंग ने औषधि खोज और अणु संशोधन में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। नवंबर 2025 में वैज्ञानिकों ने एकल-अणु स्तर पर स्केलेटल एडिटिंग का प्रदर्शन किया, जिसमें ऑक्सीजन परमाणु को हटाने और रिंग संकुचन जैसी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की गईं। इसके अलावा 2024 में वैज्ञानिकों ने कार्बन-से-नाइट्रोजन प्रतिस्थापन और एक चरण में क्विनोलिन संश्लेषण जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिससे इस क्षेत्र की संभावनाएं और बढ़ गईं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनिलीन (Aniline) एक एरोमैटिक अमीन है, जिसका रासायनिक सूत्र C₆H₅NH₂ है।
  • पाइरीडीन (Pyridine) एक छह-सदस्यीय एरोमैटिक हेटरोसाइक्लिक यौगिक है, जिसमें एक नाइट्रोजन परमाणु होता है।
  • क्विनोलिन (Quinoline) एक द्विचक्रीय हेटरोसाइक्लिक यौगिक है, जिसका उपयोग औषधि रसायन विज्ञान में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री को हरित रसायन विज्ञान की उभरती तकनीकों में शामिल किया जाता है।
  • अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) संयुक्त राज्य अमेरिका में दवाओं की स्वीकृति और विनियमन के लिए जिम्मेदार संस्था है।

माइक्रोड्रॉपलेट केमिस्ट्री और स्केलेटल एडिटिंग जैसी तकनीकें रसायन विज्ञान को अधिक कुशल, ऊर्जा-संरक्षक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन तकनीकों का उपयोग नई दवाओं, उन्नत सामग्रियों और टिकाऊ रासायनिक प्रक्रियाओं के विकास में और अधिक बढ़ने की संभावना है।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

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