महाराष्ट्र में सर्पदंश अब अनिवार्य रिपोर्टिंग वाली बीमारी
महाराष्ट्र सरकार ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में संदिग्ध, संभावित और पुष्ट सभी मामलों के साथ-साथ मौतों की भी अनिवार्य रिपोर्टिंग करनी होगी। कदम का उद्देश्य सर्पदंश से जुड़े मामलों की बेहतर निगरानी, उपचार की समय पर व्यवस्था और राज्य स्तर पर एक मजबूत डेटा सिस्टम तैयार करना है।
रिपोर्टिंग का नया ढांचा
नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पताल, निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्यकर्मी हर मामले की सूचना देंगे। रिपोर्ट में काटे जाने की तारीख और स्थान, मरीज की उम्र और लिंग, विषाक्तता के लक्षण तथा दी गई एंटी-स्नेक वेनम की सटीक मात्रा दर्ज करनी होगी। इन मामलों की सूचना हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के जरिए भेजी जाएगी।
राज्य स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी निदेशक, अस्पतालों को दी गई है, जबकि जिला स्तर पर जिला सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे। इससे राज्य से जिले तक एक औपचारिक रिपोर्टिंग श्रृंखला बनेगी, जिससे केस रजिस्ट्रेशन और फॉलो-अप आसान होगा।
क्यों अहम है यह फैसला
सर्पदंश भारत में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और आपात चिकित्सा समस्या मानी जाती है, क्योंकि विषाक्तता कुछ ही घंटों में जानलेवा हो सकती है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जोखिम अधिक रहता है, क्योंकि वहां खेतों, जंगलों और दूरस्थ बस्तियों में सांपों से संपर्क की संभावना ज्यादा होती है और इलाज तक पहुंच अक्सर देर से होती है।
महाराष्ट्र में यह निर्णय ऐसे समय आया है जब राज्य में सर्पदंश के मामलों का बोझ काफी बड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच राज्य में लगभग 1.29 लाख सर्पदंश मामले और 655 संबंधित मौतें दर्ज की गईं। ऐसे में अधिसूचित रोग का दर्जा मिलने से वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन, संसाधनों की योजना और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
जापटलाई की घटना के बाद सख्ती
इस नीति बदलाव की पृष्ठभूमि में गड़चिरोली जिले के जापटलाई गांव के एक सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूल में 9 अगस्त 2026 को हुई सर्पदंश की घटना भी रही, जिसमें तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी और तीन अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इसके बाद राज्य सरकार ने 19 अगस्त 2026 को उस आवासीय स्कूल का लाइसेंस रद्द कर दिया।
यह घटना बताती है कि सर्पदंश केवल चिकित्सा का नहीं, बल्कि संस्थागत सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया का भी विषय है। रिपोर्टिंग अनिवार्य होने से ऐसे मामलों की पहचान, उपचार और निगरानी पहले से अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अधिसूचित रोग वे होते हैं जिनकी सूचना स्वास्थ्य संस्थानों को सरकार को देना अनिवार्य होता है।
- भारत में इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम रोग निगरानी और रिपोर्टिंग की प्रमुख प्रणाली है।
- हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम स्वास्थ्य डेटा संग्रह और निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- एंटी-स्नेक वेनम विषैले सर्पदंश के कई मामलों में मानक और विशिष्ट उपचार माना जाता है।
महाराष्ट्र का यह कदम सर्पदंश को एक रिपोर्टेबल सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में स्थापित करता है। इससे राज्य में मामलों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और इलाज, निगरानी तथा रोकथाम की नीति अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेगी।