भारत-स्विट्ज़रलैंड सहयोग में नई गति, पांच समझौतों से बढ़ेगा संपर्क

भारत-स्विट्ज़रलैंड सहयोग में नई गति, पांच समझौतों से बढ़ेगा संपर्क

भारत और स्विट्ज़रलैंड ने 5 अक्टूबर 2026 को पांच द्विपक्षीय सहयोग दस्तावेजों पर सहमति जताई। स्विट्ज़रलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की भारत यात्रा के दौरान हुए इन समझौतों का दायरा प्रवासन, युवा पेशेवरों का आदान-प्रदान, परिवहन प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक शोध और नवाचार से जुड़ा है। इन पहलों को दोनों देशों के बीच कौशल, अनुसंधान और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रवासन और गतिशीलता पर नया ढांचा

प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी से जुड़े समझौता ज्ञापन में समान व्यवहार के सिद्धांत, अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और तस्करी जैसे मुद्दों पर सहयोग का प्रावधान है। इसके तहत बहु-प्रवेश वीजा अधिकतम पांच वर्ष तक वैध रह सकेंगे। साथ ही, प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक ठहरने की अनुमति और छात्रों के लिए एक वर्ष के नवीकरणीय परमिट का भी प्रावधान रखा गया है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की कोशिश है।

युवा पेशेवरों और परिवहन क्षेत्र में सहयोग

युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान संबंधी समझौते के तहत हर वर्ष दोनों देशों से 300-300 युवा पेशेवरों को अवसर मिलेगा। आवश्यकता पड़ने पर यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है। इससे युवाओं को अंतरराष्ट्रीय कार्य-अनुभव, नेटवर्किंग और कौशल विकास का अवसर मिलेगा।

इसी तरह, भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा स्विट्ज़रलैंड के संघीय आर्थिक मामलों, शिक्षा और अनुसंधान विभाग के बीच हुए समझौते में परिवहन प्रौद्योगिकी, गतिशीलता प्रणालियों, अवसंरचना, इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सुरंगों और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह सहयोग शहरी परिवहन और टिकाऊ अवसंरचना के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

शोध, नवाचार और स्टार्टअप सहयोग

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच हुए आशय पत्र का उद्देश्य शोध समुदायों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ाना है। इससे संयुक्त वैज्ञानिक पहलों को प्रोत्साहन मिलेगा और अनुसंधान नेटवर्क मजबूत होगा।

इसके अलावा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता पर केंद्रित है। यह सहयोग इंडो-स्विस अकादमी-इंडस्ट्री ट्रेनिंग कार्यक्रम के माध्यम से शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को समर्थन देने में मदद करेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता अक्टूबर 2025 में लागू हुआ था।
  • टीईपीए का लक्ष्य 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना है।
  • इसी समझौते के तहत 15 वर्षों में भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली, उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों के लिए एक प्रमुख स्थल है।

भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच ये नए दस्तावेज़ दिखाते हैं कि दोनों देश व्यापार के साथ-साथ कौशल, शोध और तकनीकी सहयोग को भी समान महत्व दे रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों का असर शिक्षा, उद्योग और नवाचार के क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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