भारत स्पाइस मैप से मसाला खेती और बाजार की मांग में होगा बेहतर तालमेल
भारत में मसालों की खेती को उद्योग की जरूरतों और निर्यात बाजारों से जोड़ने के लिए प्रस्तावित ‘भारत स्पाइस मैप’ पर 9 अक्टूबर 2026 को केरल के कोच्चि में राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। मसाला बोर्ड इंडिया और आईसीएआर-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान की ओर से आयोजित इस चर्चा में भू-स्थानिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और बाजार संबंधी जानकारी के उपयोग पर जोर दिया गया। यह संगोष्ठी ‘रिफॉर्म उत्सव’ पहल का हिस्सा थी।
खेती के क्षेत्रों और किस्मों का होगा मानचित्रण
भारत स्पाइस मैप का उद्देश्य प्रमुख मसाला फसलों के उत्पादन क्षेत्रों, किस्मों और उनसे जुड़ी विशिष्ट गुणवत्ता विशेषताओं का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना है। भारत में काली मिर्च, इलायची, हल्दी और मिर्च जैसी फसलें अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। इन क्षेत्रों की जानकारी को एक साथ रखने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस इलाके में कौन-सी किस्म और गुणवत्ता उपलब्ध है।
भू-स्थानिक तकनीक स्थान से जुड़े आँकड़ों के आधार पर भौगोलिक विशेषताओं का विश्लेषण और नक्शे पर प्रदर्शन करती है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से ऐसे आँकड़ों को भूमि, जलवायु और फसल उत्पादन की जानकारी के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे उत्पादकों और उद्योगों के बीच घरेलू खरीद के लिए बेहतर तालमेल बनाने में सहायता मिल सकती है।
घरेलू आपूर्ति और निर्यात को मजबूती
इस पहल से मसाला मूल्य शृंखला को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने और मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यात का विस्तार करने की संभावना है। उद्योग को उसकी जरूरत के अनुरूप मसालों की उपलब्धता, क्षेत्र और गुणवत्ता की जानकारी मिले तो खरीद और आपूर्ति की योजना अधिक सटीक बनाई जा सकती है। इससे केवल थोक मसालों की बिक्री के बजाय प्रसंस्कृत और अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान देना भी आसान होगा।
अप्रैल 2026 में भारत स्पाइसेज़ कॉन्क्लेव में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने नवाचार, गुणवत्ता और मूल्यवर्धन के जरिए थोक आपूर्ति से आगे बढ़ने की जरूरत बताई थी। मसालों पर भौगोलिक संकेतक (जीआई) भी किसी क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की पहचान और प्रतिष्ठा को दर्शाते हैं। मालाबार पेपर और अलेप्पी ग्रीन कार्डमम इसके उदाहरण हैं।
संस्थागत भूमिका और गुणवत्ता मानक
मसाला बोर्ड इंडिया केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन वैधानिक निकाय है। यह इलायची और अन्य मसालों के विकास तथा निर्यात संवर्धन से जुड़ा है। आईसीएआर-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का हिस्सा है और मसाला फसलों पर अनुसंधान करता है।
मसाला बोर्ड की ‘स्पाइस्ड’ योजना का कुल परिव्यय 422.30 करोड़ रुपये है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में इलायची की उत्पादकता बढ़ाना, कटाई के बाद गुणवत्ता सुधारना, मूल्यवर्धित और जीआई-चिह्नित मसालों को प्रोत्साहित करना तथा अंतरराष्ट्रीय खाद्य-सुरक्षा मानकों को पूरा करना शामिल है। कटाई के बाद की गतिविधियों में फसल का संभालना, प्रसंस्करण, भंडारण और पैकेजिंग आते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मसाला बोर्ड इंडिया केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।
- जीआई चिह्न किसी उत्पाद की गुणवत्ता या प्रतिष्ठा को उसके भौगोलिक मूल से जोड़ता है।
- भारत स्पाइस मैप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 9 अक्टूबर 2026 को कोच्चि, केरल में हुई।
भारत स्पाइस मैप की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्र-विशेष की खेती और गुणवत्ता संबंधी जानकारी को उद्योग की मांग से कितनी प्रभावी तरह जोड़ा जाता है। इससे मसाला क्षेत्र में घरेलू आपूर्ति और मूल्यवर्धित निर्यात, दोनों को दिशा मिल सकती है।