कैंसर दवाओं पर 30% व्यापार मार्जिन सीमा से मरीजों को राहत

कैंसर दवाओं पर 30% व्यापार मार्जिन सीमा से मरीजों को राहत

कैंसर के इलाज का खर्च कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कुछ गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के व्यापार मार्जिन पर 30% की सीमा लगाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। 8 अक्टूबर 2026 को लिया गया यह निर्णय अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर लागू होगा। अनुमान है कि इससे दवाओं की कीमतें 20% से 70% तक घट सकती हैं और मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।

कैंसर दवाओं के लिए क्या बदलेगा

प्रस्तावित सीमा उन गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर लागू होगी, जिन्हें अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा। एनपीपीए के विश्लेषण में इन दवाओं पर औसतन करीब 170% व्यापार मार्जिन पाया गया; कुछ मामलों में यह 700% तक था। ऐसे ऊंचे मार्जिन के कारण एक ही दवा की कीमत आपूर्ति शृंखला के अलग-अलग चरणों में काफी बढ़ सकती है। 30% की सीमा का उद्देश्य इस बढ़ोतरी को नियंत्रित करना और मरीजों के लिए दवाएं अधिक किफायती बनाना है।

दवाओं की सूची और लागू करने की प्रक्रिया

एनपीपीए ने यह प्रस्ताव अपनी 151वीं बैठक में मंजूर किया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन विशेषज्ञ समिति प्रस्तावित 110 कैंसर दवाओं की सूची को अंतिम रूप देगी। इनमें 35 पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं। सूची तय होने के बाद एनपीपीए औपचारिक अधिसूचना जारी करेगा; इसलिए फिलहाल प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, अंतिम सूची और लागू होने की अधिसूचना बाकी है। संबंधित दवा निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि कीमतों पर नियंत्रण के साथ दवाओं की उपलब्धता प्रभावित न हो।

मौजूदा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था से संबंध

भारत में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने का ढांचा औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत काम करता है। एनपीपीए इस आदेश को लागू करने वाली वैधानिक संस्था है। राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल अनुसूचित दवाओं के लिए यह अधिकतम कीमत तय करता है। गैर-अनुसूचित दवाओं पर वही मूल्य-सीमा व्यवस्था लागू नहीं होती; हालांकि, इनके निर्माता आम तौर पर एक वर्ष में अधिकतम खुदरा मूल्य 10% से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते। प्रस्तावित कदम चुनिंदा गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के व्यापार मार्जिन को सीधे सीमित करेगा। फरवरी 2019 में भी 42 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर मार्जिन सीमा लगाई गई थी। उस व्यवस्था में 526 ब्रांड शामिल हुए और सालाना 984 करोड़ रुपये की बचत हुई थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनपीपीए औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण लागू करता है।
  • अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमत तय होती है; गैर-अनुसूचित दवाओं पर अलग व्यवस्था लागू होती है।
  • नई प्रस्तावित सूची में 110 कैंसर दवाएं हैं, जिनमें 35 पेटेंट वाली दवाएं शामिल हैं।
  • वर्ष 2019 की मार्जिन सीमा 42 दवाओं के 526 ब्रांडों पर लागू हुई थी।

अंतिम सूची और अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रस्तावित सीमा का वास्तविक दायरा स्पष्ट होगा। इसका असर दवाओं की कीमतों के साथ उनकी उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा।

Originally written on October 9, 2026 and last modified on October 9, 2026.

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