आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया, महंगाई पर सख्त रुख
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% कर दिया। मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया और नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया। यह कदम ऐसे समय आया है जब महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों को लेकर दबाव बना हुआ है।
रेपो रेट बढ़ाने का क्या मतलब है
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब यह दर बढ़ती है, तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है और आगे चलकर कर्ज महंगा होने की संभावना बनती है। इसका असर होम लोन, ऑटो लोन और कॉरपोरेट उधारी जैसी कई श्रेणियों पर पड़ सकता है।
25 आधार अंक की बढ़ोतरी का अर्थ 0.25 प्रतिशत अंक की वृद्धि होता है। यह मौद्रिक नीति का एक अहम औजार है, जिसका इस्तेमाल आरबीआई तरलता और महंगाई पर नियंत्रण के लिए करता है।
मौद्रिक नीति समिति का फैसला क्यों अहम है
मौद्रिक नीति समिति में छह सदस्य होते हैं और यह आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत नीतिगत रेपो दर तय करती है। इस बार समिति ने सर्वसम्मति से दर बढ़ाने का निर्णय लिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो दर वृद्धि है। इससे पहले 2025 में दरों में कटौती का दौर रहा, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने लंबे समय तक यथास्थिति बनाए रखी थी।
आरबीआई ने अपने रुख में बदलाव करते हुए संकेत दिया है कि आगे की नीति कार्रवाई आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यानी भविष्य में या तो दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है या फिर बैंक कुछ समय के लिए विराम भी ले सकता है।
महंगाई, विकास अनुमान और आगे की दिशा
इस फैसले के पीछे महंगाई का दबाव, पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े जोखिम, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की कमजोरी जैसे कारण बताए गए हैं। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% तक पहुंच गई थी, जिससे मूल्य दबाव की चिंता बढ़ी।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अनुमान को 5.0% से बढ़ाकर 5.2% किया गया है। यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक विकास की मजबूती को स्वीकार करते हुए भी कीमतों पर नियंत्रण को प्राथमिकता दे रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
- 25 आधार अंक = 0.25 प्रतिशत अंक होते हैं।
- मौद्रिक नीति समिति में कुल 6 सदस्य होते हैं।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) भारत में खुदरा महंगाई मापता है।
यह फैसला संकेत देता है कि आरबीआई फिलहाल महंगाई को लेकर सतर्क है और दरों के मोर्चे पर सख्ती बनाए रख सकता है। आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति, तेल कीमतें और रुपये की चाल नीति दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।