आरबीआई का सख्त नकदी नियम, बैंकों की अतिरिक्त तरलता पर असर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) की दैनिक न्यूनतम सीमा 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत कर दी है। यह बदलाव 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े से लागू होगा। सीआरआर की मूल दर 3 प्रतिशत पर ही रहेगी, लेकिन बैंक अब हर दिन इस निर्धारित राशि के लगभग पूरे हिस्से को आरबीआई के पास नकद रूप में बनाए रखेंगे।
दैनिक सीआरआर नियम में क्या बदला
सीआरआर वह हिस्सा है जिसे बैंक अपनी शुद्ध मांग और समय देयताओं (एनडीटीएल) के अनुपात में आरबीआई के पास नकद शेष के रूप में रखते हैं। आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत केंद्रीय बैंक सीआरआर निर्धारित करता है और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को इसका पालन करना होता है।
पहले बैंक किसी पखवाड़े के प्रत्येक दिन निर्धारित सीआरआर का कम-से-कम 90 प्रतिशत रखते थे, जबकि पूरे पखवाड़े का औसत पूरा करना जरूरी था। नई व्यवस्था में दैनिक न्यूनतम सीमा 99 प्रतिशत होगी। इससे किसी दिन सीआरआर में कमी रखने की गुंजाइश घटेगी। हालांकि, बैंकों की देयताओं पर लागू कुल सीआरआर दर 3 प्रतिशत ही है।
अतिरिक्त नकदी के बीच आरबीआई की कार्रवाई
आरबीआई ने 9 अक्टूबर को यह निर्णय ऐसे समय लिया, जब 8 अक्टूबर तक बैंकिंग प्रणाली में लगभग 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता थी। नई दैनिक शर्त से बैंकिंग प्रणाली से करीब एक लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि अलग रहने की संभावना है। यह कदम नकदी की उपलब्धता को अधिक नियंत्रित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
आरबीआई बाजार में नकदी घटाने या बढ़ाने के लिए तरलता प्रबंधन के कई उपाय अपनाता है। खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत वह सरकारी प्रतिभूतियां खरीदता या बेचता है। प्रतिभूतियों की बिक्री से बैंकिंग प्रणाली से धन निकलता है। आरबीआई ने 13 अक्टूबर 2026 को 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का कार्यक्रम भी तय किया है।
रेपो दर और विदेशी मुद्रा जमा का संदर्भ
यह बदलाव 7 अक्टूबर को रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि के बाद आया है। रेपो दर वह दर है जिस पर आरबीआई अपनी तरलता व्यवस्था के तहत पात्र बैंकों को प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालीन धन देता है। 25 आधार अंकों की वृद्धि से दर 5.50 प्रतिशत हो गई। एक आधार अंक, एक प्रतिशत अंक का सौवां हिस्सा होता है।
बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी का एक कारण आरबीआई की विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा योजना के तहत जुटी डॉलर जमा राशि भी रही। यह योजना 31 अगस्त 2026 को समाप्त हुई। इसके पात्र खातों में अनिवासी भारतीय अनुमत विदेशी मुद्राओं में सावधि जमा रख सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बैंक सीआरआर की राशि आरबीआई के पास नकद शेष के रूप में रखते हैं।
- सीआरआर की निर्धारित दर 3 प्रतिशत है; दैनिक न्यूनतम अनुपालन सीमा 90 से बढ़कर 99 प्रतिशत हुई है।
- नई दैनिक सीमा 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले रिपोर्टिंग पखवाड़े में लागू होगी।
- आरबीआई का 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का ओएमओ 13 अक्टूबर 2026 के लिए तय है।
कुल सीआरआर दर में बदलाव किए बिना दैनिक अनुपालन कड़ा करने से बैंकों के नकदी प्रबंधन पर असर पड़ेगा। आरबीआई का यह कदम अतिरिक्त तरलता को व्यवस्थित करने के लिए उठाए गए हालिया उपायों के साथ जुड़ा है।