भारत-श्रीलंका कर संधि में सख्ती, टैक्स लाभ पर नई रोक

भारत-श्रीलंका कर संधि में सख्ती, टैक्स लाभ पर नई रोक

भारत ने श्रीलंका के साथ अपनी कर संधि व्यवस्था में एक अहम एंटी-अब्यूज नियम जोड़ा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कर संधियों का इस्तेमाल केवल वैध कर राहत के लिए हो, न कि कृत्रिम ढांचे बनाकर अनावश्यक टैक्स लाभ लेने के लिए। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कराधान में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है नया नियम

नए प्रावधान के तहत कर प्राधिकरण किसी व्यवस्था या लेनदेन में कर लाभ को अस्वीकार कर सकते हैं, यदि उस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य संधि के लाभ हासिल करना हो। इसे प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट कहा जाता है। सरल शब्दों में, यदि किसी लेनदेन का मुख्य मकसद टैक्स में छूट, कम दर या अन्य संधि लाभ लेना है, तो उस लाभ को रोका जा सकता है।यह नियम उन मामलों पर रोक लगाने के लिए है जहां करदाता किसी तीसरे ढांचे या मध्यवर्ती रास्ते का उपयोग करके कम कर दर का फायदा उठाते हैं। अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था में इसे ट्रीटी शॉपिंग जैसी प्रथाओं को रोकने का उपाय माना जाता है।

डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट क्यों अहम है

दो देशों के बीच होने वाला डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट यह तय करता है कि आय पर कर लगाने का अधिकार किस देश को होगा। यह व्यवस्था डिविडेंड, ब्याज, रॉयल्टी और व्यापारिक लाभ जैसी आय पर लागू होती है। इसका उद्देश्य यह है कि एक ही आय पर दो बार कर न लगे और सीमा-पार व्यापार, निवेश तथा सेवाओं को बढ़ावा मिले।भारत ने कई देशों के साथ ऐसे कर समझौते किए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में कर नियम स्पष्ट रहें। लेकिन समय के साथ यह भी देखा गया कि कुछ मामलों में इन संधियों का उपयोग वास्तविक आर्थिक गतिविधि के बजाय केवल कर लाभ के लिए किया जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए एंटी-अब्यूज नियमों को संधियों में शामिल किया जा रहा है।

भारत-श्रीलंका आर्थिक संबंधों पर असर

भारत और श्रीलंका के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय लेनदेन का लगातार संपर्क बना रहता है। ऐसे में कर संधि के नियम कंपनियों, निवेशकों और उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों से जुड़े हैं। नया प्रावधान यह संदेश देता है कि कर लाभ तभी मिलेगा जब लेनदेन का उद्देश्य और संरचना वास्तविक और वैध हो।यह बदलाव केवल भारत-श्रीलंका संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कर नीति की उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें देशों को कर संधियों को अधिक मजबूत, न्यायसंगत और दुरुपयोग-रोधी बनाना पड़ रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट अंतरराष्ट्रीय कर कानून में संधि दुरुपयोग रोकने का एक प्रमुख मानक है।
  • डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट दो देशों के बीच ऐसा समझौता है जो एक ही आय पर दो बार कर लगने से बचाता है।
  • ट्रीटी शॉपिंग वह प्रक्रिया है जिसमें करदाता किसी मध्यवर्ती देश के जरिए कर लाभ लेने की कोशिश करते हैं।
  • एंटी-अब्यूज क्लॉज वैश्विक स्तर पर निष्पक्ष कराधान और पारदर्शिता को मजबूत करने का हिस्सा हैं।

कुल मिलाकर, भारत-श्रीलंका कर संधि में यह सख्ती कर व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में कदम है। इससे वैध सीमा-पार आर्थिक गतिविधियों को संरक्षण मिलेगा, लेकिन संधि का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ लेने की गुंजाइश कम होगी।

Originally written on July 21, 2026 and last modified on July 21, 2026.

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