भारत में खरीद दोगुनी करने की तैयारी में जीई एयरोस्पेस
जीई एयरोस्पेस ने 2030 तक भारत से सालाना खरीद बढ़ाकर लगभग 400 मिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। 2025 में यह खर्च करीब 200 मिलियन डॉलर था। कंपनी ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया टेकिंग फ्लाइट’ कार्यक्रम में यह योजना साझा की। बढ़ती विमानन मांग के बीच यह कदम भारत के विनिर्माण और विमान इंजन आपूर्ति तंत्र के लिए अहम है।
घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मिलेगा विस्तार
भारत में जीई एयरोस्पेस की आपूर्ति श्रृंखला में 17 प्रमुख घरेलू साझेदार शामिल हैं। इनमें छोटे और मध्यम उद्यम भी हैं। पुणे स्थित विनिर्माण केंद्र इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी के दक्षिण एशिया प्रमुख विक्रम राय ने बताया कि खरीद बढ़ाने की योजना भारत के विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग से जुड़ी है। इससे घरेलू कंपनियों को विमानन उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला में अधिक अवसर मिल सकते हैं।
कंपनी और उसके संयुक्त उद्यमों के 1,400 से अधिक वाणिज्यिक विमान इंजन दिसंबर 2025 तक भारत में सेवा दे रहे थे। अगले नौ से दस वर्षों में 3,200 से अधिक इंजनों की आपूर्ति की उम्मीद है। विमानों और इंजनों की संख्या बढ़ने से निर्माण के साथ-साथ रखरखाव और मरम्मत सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी।
एमआरओ क्षेत्र में बड़ा अवसर
ईवाई द्वारा तैयार ‘पावरिंग प्रोग्रेस: जीई एयरोस्पेस्स इकोनॉमिक इम्पैक्ट इन इंडिया’ रिपोर्ट में वाणिज्यिक विमानन, रक्षा, विनिर्माण और इंजीनियरिंग में कंपनी की गतिविधियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल यानी एमआरओ क्षेत्र में 5.5 अरब डॉलर से अधिक का अवसर बन सकता है। यह संभावना भारतीय विमानन कंपनियों के लगभग 1,500 विमानों के लंबित ऑर्डर से जुड़ी है। इनमें से अधिकांश विमानों को ऐसे इंजन संचालित करेंगे जिनकी देखरेख के लिए एमआरओ सेवाओं की जरूरत होगी।
जुलाई 2026 में इंडिगो ने सीएफएम इंटरनेशनल के साथ एक हजार से अधिक एलईएपी-1ए इंजनों के लिए समझौता ज्ञापन किया। सीएफएम इंटरनेशनल, जीई एयरोस्पेस और सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन का संयुक्त उद्यम है। समझौते में इंडिगो की प्रस्तावित इंजन एमआरओ सुविधा को समर्थन देने का प्रावधान भी शामिल है।
पुणे और बेंगलुरु में विनिर्माण तथा तकनीकी काम
पुणे का विनिर्माण केंद्र 2015 में स्थापित हुआ था। 2024 से यहां स्वचालन, सटीक विनिर्माण और कर्मचारियों के कौशल विकास में करीब 55 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है। केंद्र के प्रशिक्षु कार्यक्रम से 2015 के बाद लगभग 5,000 उत्पादन सहयोगी प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। हर साल 400 से 500 नए प्रशिक्षु इसमें शामिल होते हैं।
बेंगलुरु प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना 2000 में हुई थी। इसके इंजीनियरों ने विमानन से जुड़े एक हजार से अधिक पेटेंट हासिल किए हैं और जीई9एक्स इंजन तथा सीएफएम राइज तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम में योगदान दिया है। राइज कार्यक्रम का लक्ष्य ईंधन दक्षता में 20 प्रतिशत सुधार करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जीई एयरोस्पेस का भारत से सालाना खरीद लक्ष्य 2030 तक लगभग 400 मिलियन डॉलर है।
- सीएफएम इंटरनेशनल, जीई एयरोस्पेस और सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन का संयुक्त उद्यम है।
- इंडिगो के जुलाई 2026 के समझौता ज्ञापन में एलईएपी-1ए इंजन शामिल हैं।
- बेंगलुरु प्रौद्योगिकी केंद्र 2000 में स्थापित हुआ और वहां एक हजार से अधिक विमानन पेटेंट हासिल किए गए हैं।
भारत से खरीद बढ़ाने की योजना विमानन आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू भागीदारी और कौशल विकास को प्रोत्साहन दे सकती है। साथ ही, विमानों की बढ़ती संख्या के साथ एमआरओ सेवाओं का विस्तार भी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।