भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता का तेजी से विस्तार: 2035-36 तक 888 गीगावॉट-घंटे का लक्ष्य

भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता का तेजी से विस्तार: 2035-36 तक 888 गीगावॉट-घंटे का लक्ष्य

भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस परिवर्तन में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण बिजली की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी ऊर्जा भंडारण आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारत ने वर्ष 2035-36 तक 888 गीगावॉट-घंटे (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान स्थापित क्षमता की तुलना में यह एक बड़ा विस्तार होगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा ग्रिड स्थिरता को मजबूत करेगा।

ऊर्जा भंडारण प्रणाली क्या है और इसका महत्व

ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage System-ESS) ऐसी तकनीक है जो अतिरिक्त बिजली को भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखती है। भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार की ऊर्जा भंडारण प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। पहली, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System-BESS), जिसमें रिचार्जेबल बैटरियों में बिजली संग्रहित की जाती है। दूसरी, पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP), जिसमें अतिरिक्त बिजली की सहायता से पानी को ऊंचे जलाशय तक पहुंचाया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर उसी पानी से बिजली उत्पन्न की जाती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2035-36 तक कुल 888 GWh ऊर्जा भंडारण आवश्यकता में लगभग 321 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और 567 GWh पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं से पूरी की जाएगी।

बैटरी ऊर्जा भंडारण में तेज प्रगति

भारत में बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 तक जहां स्थापित क्षमता लगभग 0.78 GWh थी, वहीं वर्ष 2026 की पहली छमाही तक यह बढ़कर लगभग 8.7 GWh पहुंच गई। अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक यह क्षमता 10 GWh का आंकड़ा पार कर जाएगी। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में तेजी से निवेश और तकनीकी विकास कर रहा है।

टेंडर और विनिर्माण क्षमता का विस्तार

ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में सरकारी और निजी निवेश लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान लगभग 47 GWh क्षमता के ऊर्जा भंडारण टेंडर जारी किए गए। इसके साथ ही कुल ऊर्जा भंडारण टेंडर पाइपलाइन लगभग 260 GWh तक पहुंच चुकी है। हालांकि वर्तमान में भारत की लिथियम-आयन बैटरी सेल निर्माण क्षमता लगभग 2 GWh है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसमें बड़ा विस्तार प्रस्तावित है। वर्ष 2030 तक देश की लिथियम-आयन बैटरी सेल निर्माण क्षमता लगभग 110 GWh तक पहुंचने की योजना है। वहीं सेल तथा बैटरी पैक-टू-कंटेनर निर्माण क्षमता दशक के अंत तक 180 से 200 GWh तक पहुंचने का अनुमान है।

नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रिड विश्वसनीयता में योगदान

भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता का विस्तार केवल बिजली संग्रहित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक प्रभावी उपयोग का आधार भी बनेगा। जब सौर या पवन ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है, तब अतिरिक्त बिजली को संग्रहित किया जा सकेगा और मांग बढ़ने पर उसी ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। इससे बिजली ग्रिड अधिक विश्वसनीय बनेगा, बिजली आपूर्ति में बाधाएं कम होंगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) रिचार्जेबल बैटरियों में विद्युत ऊर्जा संग्रहित करती है और ग्रिड संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर संग्रहित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उसी पानी से बिजली उत्पन्न करते हैं।
  • इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस ऊर्जा भंडारण क्षेत्र से जुड़ा एक प्रमुख उद्योग संगठन है।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) विद्युत मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है, जो देश की बिजली योजना और तकनीकी मार्गदर्शन से संबंधित कार्य करता है।

भारत का ऊर्जा भंडारण क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बनने जा रहा है। बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, सरकारी नीतियों, निवेश और विनिर्माण विस्तार के साथ भारत ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। वर्ष 2035-36 तक 888 GWh क्षमता का लक्ष्य देश को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Originally written on July 8, 2026 and last modified on July 8, 2026.

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