भारत बना रिटेल और एफएमसीजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र
भारत ने रिटेल और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनकर एक नई उपलब्धि हासिल की है। 8 जुलाई 2026 तक देश में इस क्षेत्र के 180 जीसीसी संचालित हो रहे हैं, जिनमें 2.72 लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं। यह उपलब्धि भारत की मजबूत तकनीकी क्षमता, विशाल प्रतिभा पूल और वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत का रिटेल जीसीसी कार्यबल पोलैंड, फिलीपींस, मेक्सिको, जर्मनी और मिस्र के संयुक्त कार्यबल से भी 34 प्रतिशत अधिक है। हाल के वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत को अपने वैश्विक संचालन, अनुसंधान और डिजिटल नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाया है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर क्या हैं?
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, जिन्हें कॉर्पोरेट जगत में कैप्टिव सेंटर या ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर भी कहा जाता है, बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा स्थापित विशेष इकाइयाँ होती हैं। इनका उद्देश्य प्रौद्योगिकी, डेटा एनालिटिक्स, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला, ग्राहक अनुभव और अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक कार्यों का संचालन करना होता है। भारत में लोव्स, टेस्को, एच एंड एम, वॉलमार्ट ग्लोबल टेक, टार्गेट, लॉरियल और एबी इनबेव जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों के जीसीसी संचालित हैं, जो देश को वैश्विक नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहे हैं।
भारत के प्रमुख जीसीसी हब
रिटेल और एफएमसीजी जीसीसी के लिए बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ लगभग 84 हजार पेशेवर कार्यरत हैं। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में 66 हजार से अधिक तथा हैदराबाद में लगभग 45 हजार विशेषज्ञ कार्यरत हैं। ये शहर केवल रिटेल क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और लाइफ साइंसेज जैसे अनेक क्षेत्रों के जीसीसी के लिए भी प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। इसी कारण भारत का समग्र जीसीसी इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोजगार में तेज़ बढ़ोतरी
भारतीय रिटेल जीसीसी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। वर्ष 2022 में जहाँ एआई कार्यबल की हिस्सेदारी केवल 2.1 प्रतिशत थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2026 में इसके 7.2 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। हालांकि पूरे क्षेत्र में आठ वर्ष से अधिक अनुभव वाले एआई विशेषज्ञों की संख्या लगभग 320 ही है, जिससे अनुभवी प्रतिभाओं की मांग लगातार बनी हुई है। वर्ष 2024 से 2025 के बीच भर्ती की मांग लगभग दोगुनी हो गई और 2025 में 52 हजार से अधिक नई नौकरियों का सृजन हुआ। आने वाले वर्षों में डेटा एवं एनालिटिक्स सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला क्षेत्र माना जा रहा है। इसके साथ ही लार्ज लैंग्वेज मॉडल इंजीनियरिंग, जेनएआई ऑप्स, एमएलऑप्स तथा वेक्टर डेटाबेस जैसी नई तकनीकी भूमिकाओं की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
कार्यबल संरचना और आकर्षक वेतन
वर्तमान में भारतीय रिटेल जीसीसी के लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी प्रौद्योगिकी, ग्राहक सेवा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े कार्यों में लगे हुए हैं। अनुमान है कि वर्ष 2028 तक इन्हीं क्षेत्रों से 80 प्रतिशत से अधिक नई भर्तियाँ होंगी। वहीं तीन से छह वर्ष के अनुभव वाले एआई और मशीन लर्निंग विशेषज्ञों का औसत वार्षिक वेतन लगभग 46 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उच्च कौशल की मांग को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को कॉर्पोरेट जगत में कैप्टिव सेंटर या ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर भी कहा जाता है।
- बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद भारत के सबसे बड़े जीसीसी केंद्रों में शामिल हैं।
- एफएमसीजी का पूर्ण रूप फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स होता है।
- लार्ज लैंग्वेज मॉडल इंजीनियरिंग, एमएलऑप्स और जेनएआई ऑप्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उभरते तकनीकी क्षेत्र हैं।
भारत का रिटेल और एफएमसीजी जीसीसी क्षेत्र न केवल वैश्विक कंपनियों के लिए रणनीतिक केंद्र बन चुका है, बल्कि यह देश में उच्च कौशल आधारित रोजगार, डिजिटल नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को भी नई दिशा दे रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और अधिक विस्तार की संभावना है, जिससे भारत की वैश्विक आर्थिक और तकनीकी भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।