भारत ने समुद्री बीमा में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया बड़ा कदम
भारत ने समुद्री बीमा के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज करते हुए अपने पहले संप्रभु-समर्थित प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) बीमा उत्पाद की शुरुआत की है। यह उत्पाद भारत सरकार के समर्थन वाले भारत मरीन इंश्योरेंस पूल (BMIP) के तहत जारी किया गया और इसे द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को सौंपा। यह कदम विशेष समुद्री जोखिमों के लिए देश के भीतर बीमा क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी बीमा
प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी बीमा समुद्री परिवहन में इस्तेमाल होने वाला एक दायित्व बीमा है, जो जहाज संचालन से जुड़ी तीसरे पक्ष की देनदारियों को कवर करता है। इसमें चालक दल के दावे, कार्गो से जुड़े दावे, प्रदूषण दायित्व, मलबा हटाने की लागत और अन्य कानूनी जिम्मेदारियां शामिल हो सकती हैं। वैश्विक शिपिंग व्यवस्था में यह बीमा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि समुद्री दुर्घटनाओं में नुकसान केवल जहाज तक सीमित नहीं रहता।
भारत मरीन इंश्योरेंस पूल की भूमिका
भारत मरीन इंश्योरेंस पूल 12 मई 2026 से सक्रिय हुआ था। इसे ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी के साथ शुरू किया गया, जो लगभग 1.4 अरब डॉलर के बराबर है। इस पूल का उद्देश्य समुद्री जोखिमों के लिए संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता उपलब्ध कराना है, ताकि भारत में ही हुल एंड मशीनरी, कार्गो, P&I और युद्ध जोखिम बीमा जैसी जरूरतों को पूरा किया जा सके। इस व्यवस्था के जरिए भारत का लक्ष्य विशेष समुद्री बीमा में विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना है। यह कदम न केवल बीमा क्षेत्र की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों दृष्टि से देश के लिए उपयोगी है।
क्यों है यह कदम महत्वपूर्ण
समुद्री व्यापार भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है, इसलिए जहाजों, माल और बंदरगाह संचालन से जुड़े जोखिमों का देश के भीतर प्रबंधन जरूरी माना जाता है। BMIP के तहत P&I कवर के लिए 1.5 अरब डॉलर तक की क्षतिपूर्ति सीमा उपलब्ध कराई गई है, जो बड़े समुद्री जोखिमों को संभालने में मदद करती है। सरकारी जानकारी के अनुसार, 29 जुलाई 2026 तक BMIP के तहत 1,608 पॉलिसियां जारी की जा चुकी थीं, जिनमें कार्गो वॉर-रिस्क और हुल वॉर-रिस्क बीमा शामिल था। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान चरम स्तर पर पहुंचे युद्ध-जोखिम प्रीमियम में भी लगभग 35 से 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू पूलिंग व्यवस्था लागत और उपलब्धता, दोनों पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) बीमा समुद्री दायित्वों के लिए इस्तेमाल होने वाला मानक बीमा है।
- भारत मरीन इंश्योरेंस पूल 12 मई 2026 को सक्रिय हुआ था।
- BMIP को ₹12,980 करोड़ की संप्रभु गारंटी प्राप्त है।
- इस पूल के तहत हुल एंड मशीनरी, कार्गो, P&I और वॉर-रिस्क बीमा कवर किए जाते हैं।
इस नई शुरुआत से भारत के समुद्री बीमा ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेष जोखिमों के लिए घरेलू क्षमता विकसित होने से देश की शिपिंग और बीमा प्रणाली अधिक आत्मनिर्भर और लचीली बन सकती है।