भारत ने लॉन्च किया ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029, नशीले पदार्थों के खिलाफ बनेगी मजबूत रणनीति
भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध व्यापार और नशे की बढ़ती चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 26 जून 2026 को नई दिल्ली में ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029) लॉन्च किया गया। यह दस्तावेज़ देश में मादक पदार्थों के नियंत्रण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रवर्तन, खुफिया तंत्र, सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, नशा मुक्ति, पुनर्वास, क्षमता निर्माण और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी गई है। इस नीति का उद्देश्य केवल अवैध तस्करी पर रोक लगाना ही नहीं, बल्कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और समाज में उनकी पुनर्स्थापना को भी मजबूत करना है।
राष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण के लिए व्यापक नीति
ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट का निर्माण केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और मादक पदार्थ नियंत्रण से जुड़ी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद किया गया। यह दस्तावेज़ मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला, नशे की मांग, उपचार सेवाओं और पुनर्वास व्यवस्था को एकीकृत नीति ढांचे के अंतर्गत लाता है। इस पहल का उद्देश्य कानून प्रवर्तन को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाना, अंतर-एजेंसी समन्वय बढ़ाना तथा समाज में नशे के प्रति जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है।
चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित योजना
इस राष्ट्रीय रणनीति को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है। पहला, प्रवर्तन, खुफिया और संचालन, जिसके तहत तस्करी रोकने, जांच और अभियानों को मजबूत किया जाएगा। दूसरा, प्रीकर्सर रसायनों और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, ताकि अवैध निर्माण पर रोक लगाई जा सके। तीसरा, नशा रोकथाम और पुनर्वास, जिसके माध्यम से उपचार और पुनर्वास सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। चौथा, क्षमता निर्माण और समन्वय, जिसमें विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग तथा अधिकारियों के प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया है।
एनसीबी और नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर की भूमिका
इस दस्तावेज़ का अनावरण नारको-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक के दौरान किया गया, जिसका आयोजन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने किया। एनसीओआरडी केंद्र और राज्य सरकारों की एजेंसियों के बीच मादक पदार्थ नियंत्रण से जुड़े समन्वय का प्रमुख तंत्र है। कार्यक्रम के दौरान जम्मू और गुवाहाटी में एनसीबी के नए क्षेत्रीय कार्यालयों का भी वर्चुअल उद्घाटन किया गया। साथ ही ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोज़ल पखवाड़ा अभियान की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत लगभग 2.09 लाख किलोग्राम जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 6,000 करोड़ रुपये बताई गई है।
उभरती चुनौतियाँ और कानूनी सुधार
विज़न डॉक्यूमेंट में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट आधारित तस्करी को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल किया गया है। इनसे निपटने के लिए मानव खुफिया, तकनीकी खुफिया और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे आधुनिक उपायों पर बल दिया गया है। इसके अतिरिक्त, राजस्व विभाग द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 में आवश्यक संशोधन करने की भी योजना है, ताकि कानूनी कमियों को दूर किया जा सके और नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों से संबंधित प्रमुख कानून है।
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की स्थापना वर्ष 1986 में गृह मंत्रालय के अधीन की गई थी।
- प्रीकर्सर रसायन वे पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग मादक और मनःप्रभावी दवाओं के निर्माण में किया जाता है।
- डार्कनेट इंटरनेट का वह गुप्त नेटवर्क है जिसका उपयोग अक्सर अवैध गतिविधियों, विशेषकर मादक पदार्थों की तस्करी, के लिए किया जाता है।
ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029 भारत की मादक पदार्थ नियंत्रण नीति को अधिक संगठित, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह रणनीति कानून प्रवर्तन, तकनीकी नवाचार, पुनर्वास और सामाजिक भागीदारी को एक साथ जोड़ते हुए नशामुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती है।