एससीओ महिला मंच 2026 में भारत ने महिला-नेतृत्व विकास मॉडल को किया प्रस्तुत

एससीओ महिला मंच 2026 में भारत ने महिला-नेतृत्व विकास मॉडल को किया प्रस्तुत

महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 26 जून 2026 को किर्गिज़ गणराज्य की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) महिला मंच 2026 का आयोजन किया गया। इस मंच में एससीओ सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने महिलाओं के नेतृत्व, आर्थिक भागीदारी, सामाजिक विकास और समान अवसरों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारत ने इस अवसर पर महिला-नेतृत्व विकास के अपने मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए महिलाओं की सुरक्षा, पोषण और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी विभिन्न सरकारी पहलों की जानकारी साझा की।

एससीओ और महिला सशक्तिकरण पर सहयोग

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की स्थापना वर्ष 2001 में एक यूरेशियाई अंतर-सरकारी संगठन के रूप में हुई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। संगठन सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ सामाजिक कल्याण एवं जन-से-जन संपर्क को भी बढ़ावा देता है। एससीओ महिला मंच सदस्य देशों के बीच महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी से जुड़े अनुभवों एवं नीतियों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम है। वर्ष 2026 में संगठन की घूर्णन अध्यक्षता किर्गिज़स्तान के पास थी, जिसके तहत इस सम्मेलन का आयोजन किया गया।

भारत ने प्रस्तुत किया महिला-नेतृत्व विकास का दृष्टिकोण

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। भारत ने महिला-नेतृत्व विकास को केवल कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि समावेशी विकास की आधारशिला बताया। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा, पोषण, वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। भारत ने बताया कि देश में 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ महिलाएँ बचत, ऋण सुविधा और आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत 3 करोड़ से अधिक महिलाएँ वार्षिक पारिवारिक आय कम-से-कम एक लाख रुपये तक पहुँचाने में सफल रही हैं।

प्रमुख सरकारी योजनाएँ और उनका महत्व

सम्मेलन में भारत ने मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0 जैसी प्रमुख योजनाओं का भी उल्लेख किया। मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए एक समेकित योजना है, जबकि मिशन पोषण 2.0 महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के बेहतर पोषण पर केंद्रित कार्यक्रम है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य, सामाजिक भागीदारी, पोषण स्तर और आर्थिक अवसरों को मजबूत करना है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बचत, ऋण, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी।
  • एससीओ के सदस्य देश हैं—भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान।
  • मिशन शक्ति महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण से संबंधित भारत सरकार की प्रमुख योजना है।
  • मिशन पोषण 2.0 महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण में सुधार के लिए संचालित एकीकृत कार्यक्रम है।

बिश्केक में आयोजित एससीओ महिला मंच 2026 ने यह स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल सामाजिक न्याय का विषय नहीं, बल्कि सतत और समावेशी विकास की अनिवार्य शर्त है। भारत द्वारा प्रस्तुत महिला-नेतृत्व विकास मॉडल और विभिन्न सरकारी योजनाएँ यह दर्शाती हैं कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय संसाधनों और नेतृत्व के अवसर प्रदान करके किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास को नई गति दी जा सकती है।

Originally written on June 27, 2026 and last modified on June 27, 2026.

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