भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा सहयोग में मजबूत कड़ी बना के9 वज्र-टी कार्यक्रम
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। इस सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण के9 वज्र-टी स्वचालित होवित्जर कार्यक्रम है, जिसने भारतीय सेना की तोपखाना क्षमता को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। यह परियोजना न केवल अत्याधुनिक सैन्य तकनीक के हस्तांतरण का प्रतीक है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जाती है।
के9 वज्र-टी कार्यक्रम की विशेषताएं
के9 वज्र-टी, दक्षिण कोरिया की के9 थंडर 155 मिमी स्वचालित ट्रैक्ड होवित्जर तोप का भारतीय संस्करण है। इसका निर्माण भारत में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत किया जाता है। इसका उत्पादन गुजरात के हजीरा स्थित संयंत्र में होता है, जहां इस प्रणाली में 50 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशी पुर्जों और उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इससे भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।
खरीद और बेड़े का विस्तार
भारतीय सेना के लिए के9 वज्र-टी की पहली खरीद मई 2017 में लगभग 4,500 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत की गई थी। इस अनुबंध के अंतर्गत 100 तोपों की आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई। इसके बाद वर्ष 2024 में 7,629 करोड़ रुपये की लागत से 100 अतिरिक्त के9 वज्र-टी तोपों की खरीद का नया समझौता किया गया। इसके अलावा लगभग 23,000 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत 300 और तोपों की संभावित खरीद पर भी विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो भारतीय सेना के पास के9 वज्र-टी का कुल बेड़ा 500 से अधिक हो सकता है।
संचालन और रणनीतिक महत्व
के9 वज्र-टी को भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं, विशेषकर लद्दाख जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात किया गया है। यह प्रणाली लंबी दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम है और दुर्गम पर्वतीय इलाकों में भी प्रभावी संचालन के लिए विकसित की गई है। इसकी उच्च गतिशीलता और तेज फायरिंग क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाती है। यह भारतीय सेना को गहरे लक्ष्य पर प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा संबंध
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग केवल के9 वज्र-टी तक सीमित नहीं है। दोनों देश वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों तथा अन्य उन्नत सैन्य उपकरणों के सह-विकास और उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिल रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- के9 वज्र-टी, दक्षिण कोरिया की के9 थंडर 155 मिमी स्वचालित होवित्जर का भारतीय संस्करण है।
- के9 वज्र-टी का निर्माण गुजरात के हजीरा स्थित संयंत्र में लार्सन एंड टुब्रो द्वारा किया जाता है।
- रक्षा खरीद से जुड़े प्रमुख प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं।
- प्रस्तावित अतिरिक्त खरीद को मंजूरी मिलने पर भारतीय सेना के के9 वज्र-टी बेड़े की संख्या 500 से अधिक हो सकती है।
के9 वज्र-टी कार्यक्रम भारत की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास, तकनीकी सहयोग और रक्षा औद्योगिक साझेदारी को दर्शाती है। आने वाले वर्षों में इस प्रकार की संयुक्त परियोजनाएं भारत की सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।