भारत के स्पेस सेक्टर में निजी निवेश ने पकड़ी रफ्तार

भारत के स्पेस सेक्टर में निजी निवेश ने पकड़ी रफ्तार

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश ने एक नया मुकाम हासिल किया है। 31 मार्च 2026 तक यह निवेश 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2021-22 में यह 100.5 मिलियन डॉलर था। सरकार के अनुसार, 2026 में ही 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। यह जानकारी 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी।

निजी भागीदारी से बदल रहा है स्पेस इकोसिस्टम

भारत का स्पेस सेक्टर अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। इसमें गैर-सरकारी इकाइयां, स्पेस स्टार्टअप्स और निजी कंपनियां शामिल हैं, जो उपग्रह प्रणालियों, प्रक्षेपण सेवाओं और स्पेस-आधारित अनुप्रयोगों पर काम कर रही हैं। इसी बदलाव का असर है कि 2014 में जहां सक्रिय स्पेस स्टार्टअप केवल एक था, वहीं 2026 तक यह संख्या 400 से अधिक हो गई।यह वृद्धि उन नीतिगत सुधारों से जुड़ी है, जिनके जरिए निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष गतिविधियों के दरवाजे खोले गए। इससे नवाचार, निवेश और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है।

IN-SPACe की भूमिका और अनुमति व्यवस्था

निजी भागीदारी को व्यवस्थित करने के लिए 2020 में IN-SPACe की स्थापना की गई थी। यह एक स्वायत्त नोडल एजेंसी है, जिसका काम निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देना, अनुमति देना और निगरानी करना है।14 जुलाई 2026 तक IN-SPACe ने गैर-सरकारी इकाइयों को विभिन्न अंतरिक्ष-संबंधी गतिविधियों के लिए 105 अनुमतियां जारी की थीं। इससे स्पष्ट है कि भारत में निजी कंपनियों के लिए अब एक औपचारिक और संस्थागत ढांचा मौजूद है।

नीति, फंडिंग और आगे की दिशा

भारत अंतरिक्ष नीति 2023 निजी भागीदारी के लिए मुख्य नीति दस्तावेज है। इसके साथ ही चुनिंदा अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए उदार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नियम भी लागू किए गए हैं। सरकार ने स्टार्टअप्स और निजी उद्यमों को सहारा देने के लिए IN-SPACe Seed Fund और 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड भी बनाया है।इन उपायों का उद्देश्य केवल निवेश बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में मजबूत स्थान दिलाना भी है। उपग्रह, लॉन्च सेवाएं, ग्राउंड सिस्टम और स्पेस-आधारित सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और क्षमता दोनों का विस्तार हो रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • IN-SPACe की स्थापना 2020 में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए स्वायत्त नोडल एजेंसी के रूप में की गई थी।
  • भारत अंतरिक्ष नीति 2023 निजी भागीदारी के लिए प्रमुख नीति ढांचा है।
  • भारत में निजी स्पेस निवेश 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
  • 2014 में सक्रिय स्पेस स्टार्टअप की संख्या 1 थी, जो 2026 तक 400 से अधिक हो गई।

निजी निवेश, नीति सुधार और संस्थागत समर्थन के साथ भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब तेज़ी से विस्तार कर रहा है। यह रुझान आने वाले वर्षों में स्टार्टअप्स, तकनीकी नवाचार और अंतरिक्ष सेवाओं के नए अवसरों को और मजबूत कर सकता है।

Originally written on July 24, 2026 and last modified on July 24, 2026.

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