भारत की अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दिशा में फ्रांस-समर्थित साझेदारी
भारत ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में फ्रांस-नेतृत्व वाले Future Combat Air System (FCAS) से जुड़ने की दिशा में 2026 से प्रयास तेज किए हैं। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) अभी डिजाइन चरण में है और वायु युद्ध क्षमता को लेकर वैश्विक साझेदारियों पर चर्चा भी आगे बढ़ रही है।
छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा
FCAS एक बहुराष्ट्रीय रक्षा कार्यक्रम है, जिसका नेतृत्व फ्रांस और जर्मनी कर रहे हैं। छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान केवल तेज या अधिक घातक प्लेटफॉर्म नहीं माने जाते, बल्कि इनमें उन्नत स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन, नेटवर्क-आधारित संचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता और मानव-रहित विमानों के साथ संयुक्त संचालन जैसी क्षमताएं अपेक्षित हैं।
इस क्षेत्र में अभी दो बड़े वैश्विक समूह प्रमुख हैं। एक ओर FCAS है, जबकि दूसरी ओर Global Combat Air Programme (GCAP) है, जिसमें यूनाइटेड किंगडम, इटली और जापान शामिल हैं। भारत के लिए यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य की हवाई लड़ाई में तकनीकी बढ़त ही निर्णायक भूमिका निभाएगी।
भारत की AMCA योजना और रणनीतिक जरूरतें
भारत का AMCA कार्यक्रम स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसे Aeronautical Development Agency और Defence Research and Development Organisation के ढांचे के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह परियोजना देश की आत्मनिर्भरता के लिए अहम है, लेकिन अत्याधुनिक तकनीक तक समय पर पहुंच बनाए रखने के लिए विदेशी साझेदारी के विकल्प भी खुले रखे गए हैं।
भारतीय वायुसेना ने भी पहले ऐसे सहयोग की संभावना पर विचार किया है, जिससे उन्नत वायु युद्ध तकनीकों तक पहुंच बनी रहे। साथ ही, वायुसेना की मौजूदा क्षमता में Su-30MKI बेड़े का उन्नयन भी प्राथमिकता में बना हुआ है, क्योंकि यह भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े लड़ाकू बेड़ों में से एक है।
संसदीय निगरानी और आगे की राह
18वीं लोकसभा की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने 7 अगस्त 2026 को अपनी 25वीं एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की। समिति ने रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए शुरुआती कदमों का स्वागत किया और छठी पीढ़ी के विमान कार्यक्रम के लिए स्पष्ट रोडमैप मांगा। समिति ने योजना, अधिग्रहण और विकास की दिशा को लेकर एक तयशुदा प्रगति-पथ की जरूरत पर भी जोर दिया।
यह संकेत देता है कि भारत अब केवल मौजूदा प्लेटफॉर्मों के उन्नयन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अगली पीढ़ी की हवाई क्षमता में भी अपनी भूमिका तय करने की कोशिश कर रहा है। फ्रांस की ओर से 114 Rafale लड़ाकू विमानों के लिए तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹3.25 लाख करोड़ बताई गई है। वहीं, रूस के Su-57 विकल्प को भारत ने आगे नहीं बढ़ाया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- FCAS का पूरा नाम Future Combat Air System है और यह फ्रांस व जर्मनी के नेतृत्व वाला छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है।
- GCAP में यूनाइटेड किंगडम, इटली और जापान शामिल हैं।
- AMCA भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का Advanced Medium Combat Aircraft प्रोजेक्ट है।
- Su-30MKI भारतीय वायुसेना का एक प्रमुख ट्विन-इंजन मल्टीरोल फाइटर है।
भारत के लिए यह पूरा घटनाक्रम रक्षा आधुनिकीकरण, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक वायु शक्ति योजना का संकेत है। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि देश छठी पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में कितनी जल्दी और किस रूप में प्रवेश करता है।