भारत-कनाडा वार्ता से रिश्तों में आर्थिक और रणनीतिक एजेंडा फिर सक्रिय

भारत-कनाडा वार्ता से रिश्तों में आर्थिक और रणनीतिक एजेंडा फिर सक्रिय

भारत और कनाडा ने 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में अपनी वार्षिक विदेश कार्यालय परामर्श बैठकें कीं। इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुरक्षा, रक्षा, संस्कृति तथा वाणिज्यिक-आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में आगे की दिशा पर चर्चा की।

कौन-कौन रहा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

भारतीय पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने किया, जबकि कनाडा की ओर से विदेश मामलों के उप मंत्री अरुण थंगाराज ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। विदेश कार्यालय परामर्श दो देशों के बीच नियमित कूटनीतिक तंत्र होता है, जिसके जरिए राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर समन्वय किया जाता है।

व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग पर फोकस

बैठक में दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement को 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने के लक्ष्य को दोहराया। साथ ही, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर, यानी लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने का लक्ष्य भी बरकरार रखा गया। भारत ने कनाडा के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत शुरू करने की अपनी तत्परता भी जताई।

यह संकेत देता है कि दोनों देश संबंधों को केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि निवेश, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और बाजार पहुंच जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रगति की कोशिश कर रहे हैं।

रणनीतिक भरोसे और संस्थागत संवाद पर सहमति

दोनों पक्षों ने जून 2025 के बाद से उच्च-स्तरीय संपर्कों में निरंतरता का उल्लेख किया और यह दोहराया कि द्विपक्षीय संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और कानून के शासन पर आधारित हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच संवाद को स्थिर और संस्थागत बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विदेश कार्यालय परामर्श दो देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच होने वाली नियमित समीक्षा बैठक होती है।
  • हैदराबाद हाउस नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बैठकों के लिए एक प्रमुख स्थल है।
  • महत्वपूर्ण खनिज बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण में उपयोग होते हैं।
  • द्विपक्षीय निवेश संधि निवेश सुरक्षा और नियमों को तय करने वाला समझौता होती है।

भारत और कनाडा की यह बैठक संकेत देती है कि दोनों देश संवाद को नियमित और व्यावहारिक एजेंडे के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। आने वाले महीनों में व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर इन चर्चाओं का असर और स्पष्ट हो सकता है।

Originally written on September 3, 2026 and last modified on September 3, 2026.

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