अहमदाबाद में पहली बार विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ का आयोजन

अहमदाबाद में पहली बार विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ का आयोजन

भारत 2026 में पहली बार विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ के एक चरण की मेजबानी करेगा। यह प्रतियोगिता 5 से 9 सितंबर 2026 तक गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रिवरफ्रंट पर होगी। यह टूर्नामेंट 2026 विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ का तीसरा चरण होगा और इसमें रिकर्व ओपन, कंपाउंड ओपन, W1 तथा दृष्टिबाधित वर्गों में मुकाबले होंगे।

अहमदाबाद बनेगा पैरा तीरंदाजी का नया केंद्र

अहमदाबाद चरण का आयोजन आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया, गुजरात सरकार, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ गुजरात और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है। औपचारिक उद्घाटन 4 सितंबर 2026 को द फोरम – होटल एंड कन्वेंशन, अहमदाबाद में प्रस्तावित है। साबरमती रिवरफ्रंट जैसे प्रमुख शहरी स्थल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन शहर की खेल अवसंरचना और आयोजन क्षमता को भी रेखांकित करता है।

भारतीय टीम और प्रतियोगिता की तैयारी

इस चरण के लिए 29 सदस्यीय भारतीय दल ने 23 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक गांधीनगर स्थित SAI राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण लिया। टीम में पेरिस 2024 पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह, शीतल देवी और राकेश कुमार शामिल हैं। इनमें से 11 तीरंदाजों का चयन जापान में होने वाले आइची-नागोया एशियन गेम्स के लिए भी किया गया है, जिससे इस प्रतियोगिता का महत्व और बढ़ जाता है।

विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़ का महत्व

विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज़, वर्ल्ड आर्चरी के तहत आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी सर्किट है। 2026 सीरीज़ में स्टेज 1 बैंकॉक (थाईलैंड), स्टेज 2 नोवे मेस्तो (चेकिया) और स्टेज 3 अहमदाबाद (भारत) में होगा। इस तरह भारत को थाईलैंड और चेकिया के साथ 2026 सीरीज़ के मेजबान देशों की सूची में जगह मिली है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पैरा तीरंदाजी में खिलाड़ियों को उनकी कार्यात्मक क्षमता और उपकरण श्रेणी के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
  • रिकर्व ओपन, कंपाउंड ओपन, W1 और दृष्टिबाधित वर्ग पैरा तीरंदाजी की प्रमुख श्रेणियाँ हैं।
  • वर्ल्ड आर्चरी तीरंदाजी और पैरा तीरंदाजी की वैश्विक शासी संस्था है।
  • हरविंदर सिंह, शीतल देवी और राकेश कुमार ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में पदक जीते थे।

अहमदाबाद में होने वाला यह आयोजन भारत में पैरा खेलों की बढ़ती प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की क्षमता को दर्शाता है। साथ ही, यह भारतीय तीरंदाजों को घरेलू मैदान पर शीर्ष स्तर की प्रतिस्पर्धा का अवसर भी देगा।

Originally written on September 3, 2026 and last modified on September 3, 2026.

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