भारत-उज़्बेकिस्तान रिश्तों को नई ऊंचाई, रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और उज़्बेकिस्तान ने 30 अगस्त 2026 को अपने संबंधों को ‘कम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ यानी व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताशकंद यात्रा के दौरान हुए इस फैसले के साथ दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने का संकेत दिया। साथ ही 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
क्यों अहम है यह साझेदारी
भारत और उज़्बेकिस्तान के रिश्ते 1992 में सोवियत संघ के विघटन के बाद औपचारिक रूप से स्थापित हुए थे। मध्य एशिया में स्थित उज़्बेकिस्तान भारत के लिए केवल एक साझेदार देश नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। नई रणनीतिक साझेदारी से दोनों देशों के बीच राजनीतिक भरोसा और आर्थिक सहयोग को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।
अभी दोनों देशों का व्यापार 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। 2030 का 5 अरब डॉलर का लक्ष्य मौजूदा स्तर से कई गुना वृद्धि का संकेत देता है। इसके लिए संयुक्त निवेश, उद्योगों के बीच सीधा संपर्क और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग पर जोर दिया जाएगा।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर खास फोकस
बैठक में उज़्बेकिस्तान से भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए यूरेनियम आपूर्ति का दीर्घकालिक ढांचा बनाने पर सहमति बनी। यूरेनियम परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ईंधन है, इसलिए यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है। भारत अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम में आयातित यूरेनियम का उपयोग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और घरेलू नियामकीय व्यवस्था के तहत करता है।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने संयुक्त विकास, प्रत्यक्ष औद्योगिक संपर्क और सैन्य हार्डवेयर के सह-उत्पादन को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। इससे केवल खरीद-बिक्री तक सीमित संबंधों से आगे बढ़कर तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी का रास्ता खुलता है।
सांस्कृतिक विरासत और संस्थागत समझौते
इस यात्रा के दौरान खनन, आयुर्वेद, पर्यटन, उच्च शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा उज़्बेकिस्तान में स्थित फयाज टेपा और कारा टेपा बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए भी एक आशय पत्र साइन किया गया। ये स्थल मध्य एशिया में सिल्क रूट के जरिए बौद्ध संस्कृति के प्रसार के ऐतिहासिक प्रमाण माने जाते हैं।
यह पहल भारत और मध्य एशिया के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संपर्कों को फिर से रेखांकित करती है। शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से लोगों के बीच संपर्क भी मजबूत होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया का एक द्वि-स्थलरुद्ध (doubly landlocked) देश है, यानी इसके चारों ओर भी स्थलरुद्ध देश हैं।
- Oliy Darajali Do’stlik Order उज़्बेकिस्तान का विदेशी नेताओं के लिए सर्वोच्च राज्य सम्मान है।
- यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा पदार्थ है।
- फयाज टेपा और कारा टेपा मध्य एशिया में बौद्ध विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल हैं।
इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज़्बेकिस्तान के सर्वोच्च राज्य सम्मान Oliy Darajali Do’stlik Order से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।