भारतीय स्पेस-टेक कंपनियों ने इटली में दिखाई ताकत
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र यानी इन-स्पेस के नेतृत्व में भारत की नौ निजी स्पेस-टेक कंपनियों ने 16 और 17 मई 2026 को इटली के वेनिस में आयोजित स्पेस मीटिंग्स वेनेटो 2026 में भाग लिया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इन-स्पेस के कार्यक्रम प्रबंधन और प्राधिकरण निदेशालय के निदेशक डॉ. पी.के. जैन ने किया। इस भागीदारी को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा इन-स्पेस
इन-स्पेस भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाला नियामक और प्रोत्साहन संस्थान है। इसका उद्देश्य निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों में भागीदारी की अनुमति देना और उन्हें वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अवसर उपलब्ध कराना है। भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल उपग्रह निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि लॉन्च सेवाएं, ग्राउंड स्टेशन, मिशन संचालन और अंतरिक्ष अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है।
इन भारतीय कंपनियों ने लिया हिस्सा
वेनिस में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में एस्ट्रोगेट लैब्स, एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज, व्योमिक, सुहोरा, केपलर एयरोस्पेस, हाईस्पेस टेक्नोलॉजीज, टेकमी2स्पेस, जारबिट्स प्राइवेट लिमिटेड और ध्रुव स्पेस जैसी भारतीय कंपनियों ने भाग लिया। ध्रुव स्पेस उपग्रह प्रणालियों और अंतरिक्ष अवसंरचना के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रमुख भारतीय कंपनी है, जबकि कर्नाटक स्थित एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन में सक्रिय है।
इटली की कंपनियों के साथ हुए समझौते
एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज ने 16 मई 2026 को इटली की इंपुल्सो स्पेस के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में मिशन प्रबंधन, ग्राहक पहुंच और लॉन्च सेवा नेटवर्क से जुड़ा सहयोग शामिल है। केपलर एयरोस्पेस ने अपोजियो स्पेस के साथ फ्रेमवर्क समझौता किया। इसमें ग्राउंड स्टेशन ऐज ए सर्विस, क्यूबसैट तकनीक, पेलोड सिस्टम और मिशन संचालन जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। व्योमिक ने भी वेनिस कार्यक्रम के दौरान नेविगेशन और लचीली अवसंरचना तकनीकों पर सहयोग की घोषणा की।
भारत-इटली अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा
यह यात्रा भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 से जुड़ी हुई है। यह योजना वर्ष 2024 के जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित की गई थी। इसमें अंतरिक्ष सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2025 में इटली का एयरोस्पेस प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया था। इससे दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” इन-स्पेस का पूरा नाम इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर है। ” स्पेस मीटिंग्स वेनेटो इटली के वेनिस में आयोजित होने वाला अंतरिक्ष उद्योग कार्यक्रम है। ” क्यूबसैट छोटे आकार के मानकीकृत उपग्रह होते हैं। ” ग्राउंड स्टेशन ऐज ए सर्विस उपग्रह संचार सहायता की आउटसोर्स सेवा है। भारतीय निजी अंतरिक्ष कंपनियों की यह भागीदारी दर्शाती है कि भारत वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में तेजी से अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। इटली के साथ बढ़ता सहयोग भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह तकनीक और वाणिज्यिक मिशनों को नई गति दे सकता है।