भारतीय सेना को मिलेगा नया कार्ल गुस्ताफ एम4 रॉकेट लॉन्चर, बढ़ेगी पैदल सेना की मारक क्षमता
भारतीय सेना ने जुलाई 2026 में 450 कार्ल गुस्ताफ मार्क-4 (एम4) 84 मिमी हल्के रॉकेट लॉन्चरों की खरीद के लिए अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) जारी किया है। यह कदम सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। नया कार्ल गुस्ताफ एम4 आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है और यह सैनिकों को बेहतर गतिशीलता, अधिक सटीकता तथा विभिन्न प्रकार के अभियानों में प्रभावी क्षमता प्रदान करेगा।
कार्ल गुस्ताफ एम4 की विशेषताएं
कार्ल गुस्ताफ एम4 एक कंधे से दागा जाने वाला बहुउद्देश्यीय 84 मिमी रिकॉइललेस राइफल सिस्टम है, जिसे स्वीडन की रक्षा कंपनी साब ने विकसित किया है। इसका उपयोग मुख्य रूप से टैंक रोधी अभियानों, बंकरों को नष्ट करने, पैदल सेना के समर्थन तथा अन्य सामरिक अभियानों में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ इसका हल्का वजन है। जहां पुराना एम2 संस्करण लगभग 14 किलोग्राम और एम3 संस्करण लगभग 10 किलोग्राम का था, वहीं एम4 का वजन 7 किलोग्राम से भी कम है। कम वजन होने के कारण सैनिक इसे कठिन और दुर्गम इलाकों में भी आसानी से ले जा सकते हैं।
भारत में होगा निर्माण
कार्ल गुस्ताफ एम4 का निर्माण हरियाणा के झज्जर स्थित रिलायंस एमईटी सिटी में साब की विनिर्माण इकाई में किया जाएगा। यह भारत की पहली पूर्ण विदेशी स्वामित्व वाली रक्षा विनिर्माण इकाई मानी जाती है, जिसे 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की स्वीकृति प्राप्त है। इस परियोजना के माध्यम से देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का हस्तांतरण, रोजगार के अवसर और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
संचालन क्षमता और अनुबंध की प्रमुख शर्तें
कार्ल गुस्ताफ एम4 को अत्यधिक कठिन मौसम में भी प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह -20 डिग्री सेल्सियस से लेकर +50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में कार्य कर सकता है। यही कारण है कि यह हिमालय के बर्फीले क्षेत्रों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तक भारतीय सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप माना जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के 12 महीनों के भीतर आपूर्ति शुरू करनी होगी। इसके साथ 15 वर्षों तक उत्पाद समर्थन तथा 24 महीने की वारंटी भी प्रदान की जाएगी, जिससे इसकी दीर्घकालिक परिचालन क्षमता सुनिश्चित होगी।
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में भूमिका
भारतीय सेना पिछले कई दशकों से कार्ल गुस्ताफ के एम2 और एम3 संस्करणों का उपयोग करती आ रही है। अब एम4 संस्करण को शामिल करने का उद्देश्य पुराने और अपेक्षाकृत भारी उपकरणों की जगह हल्के, आधुनिक तथा अधिक प्रभावी हथियारों को शामिल करना है। भारत में म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड इस हथियार प्रणाली के लिए विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का निर्माण भी करती है, जिससे इसकी आपूर्ति श्रृंखला और परिचालन क्षमता को घरेलू स्तर पर मजबूती मिलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कार्ल गुस्ताफ एक 84 मिमी रिकॉइललेस राइफल प्रणाली है, जिसका उपयोग दुनिया के अनेक देशों की सेनाएं करती हैं।
- कार्ल गुस्ताफ एम4, एम2 और एम3 की तुलना में सबसे हल्का संस्करण है और बेहतर गतिशीलता के लिए विकसित किया गया है।
- भारत में म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड इस हथियार प्रणाली के लिए विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का निर्माण करती है।
- रक्षा क्षेत्र में निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन कुछ मामलों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति स्वचालित मार्ग के माध्यम से दी जाती है।
भारतीय सेना द्वारा कार्ल गुस्ताफ एम4 को शामिल करना आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है। हल्के वजन, बहुउद्देश्यीय उपयोग, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन क्षमता और भारत में इसके निर्माण जैसी विशेषताएं इसे भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बनाती हैं। यह पहल सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण तंत्र को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।