भारतीय सेना की पहली इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स होंगी तैनात: युद्ध क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया को मिलेगी नई मजबूती
भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्गठन कर रही है। इसी दिशा में सेना 1 जुलाई 2026 तक अपनी पहली इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (Integrated Battle Groups – IBGs) को परिचालन (ऑपरेशनल) बनाने की तैयारी कर रही है। इनकी पहली तैनाती पानागढ़ स्थित XVII कॉर्प्स (माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स) के अंतर्गत की जाएगी, जिसका मुख्य दायित्व चीन सीमा पर संचालन करना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, संयुक्त युद्ध संचालन और आधुनिक बहु-आयामी युद्ध (Multi-domain Warfare) की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) क्या है?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) एक ब्रिगेड आकार की स्वायत्त युद्धक संरचना है, जिसे इस प्रकार विकसित किया गया है कि वह स्वतंत्र रूप से विभिन्न प्रकार के सैन्य अभियानों को अंजाम दे सके। प्रत्येक IBG में 5,000 से अधिक सैनिक होंगे तथा इसमें 12 से 13 सैन्य इकाइयाँ शामिल रहेंगी। इनमें पैदल सेना (Infantry), तोपखाना (Artillery), इंजीनियरिंग इकाइयाँ, सिग्नल कोर तथा फील्ड अस्पताल जैसी सभी आवश्यक सैन्य क्षमताएँ एक ही संरचना के भीतर उपलब्ध होंगी। इससे अलग-अलग इकाइयों पर निर्भरता कम होगी और संचालन अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगा।
माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स में होगा पहला गठन
भारतीय सेना की योजना के अनुसार XVII माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स के अंतर्गत चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप और एक फायर सपोर्ट ग्रुप का गठन किया जाएगा। इन सभी पाँच संरचनाओं का नेतृत्व मेजर जनरल रैंक के अधिकारी करेंगे। इन IBGs को विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में तेज आक्रामक और रक्षात्मक अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है। किसी भी सैन्य आदेश के बाद इनकी 48 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करने की क्षमता विकसित की जा रही है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की त्वरित तैनाती सुनिश्चित हो सके।
भारतीय सेना के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण हिस्सा
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप भारतीय सेना के व्यापक पुनर्गठन कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा हैं। सेना वर्ष 2029 तक पूरे संगठन में IBG प्रणाली लागू करने की योजना बना रही है, जबकि 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स का पूर्ण पुनर्गठन मध्य 2027 तक पूरा होने की संभावना है। सेना के इस आधुनिकीकरण अभियान में भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी तथा शक्तिबाण इकाइयों जैसी नई संरचनाओं का भी गठन किया जा रहा है। इनका उद्देश्य आधुनिक संयुक्त हथियार (Combined Arms) आधारित युद्ध संचालन को और अधिक प्रभावी बनाना है।
आईबीजी की अवधारणा और वैश्विक तुलना
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप की अवधारणा भारत के पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने प्रस्तुत की थी। इस मॉडल का पहला परीक्षण वर्ष 2019 में पाकिस्तान सीमा पर स्थित IX कॉर्प्स में किया गया था। उसी वर्ष पूर्वी क्षेत्र में आयोजित अभ्यास हिमविजय (Exercise HimVijay) के दौरान भी इसका सफल परीक्षण किया गया। IBG मॉडल की तुलना चीन की कम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड (Combined Arms Brigades) से की जाती है। दोनों का उद्देश्य अपेक्षाकृत छोटे, अधिक लचीले और तेजी से कार्रवाई करने वाले सैन्य गठन तैयार करना है, जो आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय सेना की पहली इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) को 1 जुलाई 2026 तक परिचालन में लाने की योजना है।
- पहली IBGs का गठन पानागढ़ स्थित XVII कॉर्प्स (माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स) के अंतर्गत किया जाएगा।
- प्रत्येक IBG में 5,000 से अधिक सैनिक तथा पैदल सेना, तोपखाना, इंजीनियर, सिग्नल और चिकित्सा सहायता जैसी सभी प्रमुख सैन्य इकाइयाँ शामिल होंगी।
- IBG की अवधारणा पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने प्रस्तुत की थी और इसका पहला परीक्षण वर्ष 2019 में IX कॉर्प्स तथा अभ्यास हिमविजय के दौरान किया गया था।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स का गठन भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा रणनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तेज़ तैनाती, संयुक्त युद्ध क्षमता, आधुनिक सैन्य संरचना और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी संचालन की विशेषताओं के साथ यह नई व्यवस्था भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों का अधिक सक्षम और प्रभावी ढंग से सामना करने में सहायता प्रदान करेगी।