भारतीय नौसेना को 2026 में मिलेंगी पांच स्वदेशी युद्धक नौसैनिक प्लेटफॉर्म
भारतीय नौसेना वर्ष 2026 में अपनी समुद्री शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में पांच स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल करने जा रही है। इनमें दो प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट, एक सर्वे वेसल (लार्ज) और दो एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्मों के नाम आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस महेंद्रगिरि, संशोधक, अग्रय और मालवन हैं। इन सभी जहाजों का निर्माण भारतीय शिपयार्डों द्वारा किया गया है, जो देश की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है।
प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट की विशेषताएं
प्रोजेक्ट 17ए भारतीय नौसेना के लिए विकसित आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेटों की एक श्रेणी है। इन युद्धपोतों को कम रडार पहचान क्षमता, उन्नत हथियार प्रणालियों और आधुनिक युद्धक तकनीकों से लैस किया गया है। इनका डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि शत्रु के रडार पर इनकी पहचान कठिन हो सके। आईएनएस दुनागिरि नीलगिरि श्रेणी का पांचवां युद्धपोत है, जिसे 30 मार्च 2026 को कोलकाता स्थित Garden Reach Shipbuilders & Engineers द्वारा भारतीय नौसेना को सौंपा गया। वहीं आईएनएस महेंद्रगिरि को जून 2026 में नौसेना में शामिल किए जाने की योजना है। ये दोनों युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेंगे।
सर्वे वेसल (लार्ज) कार्यक्रम
संशोधक चार सर्वे वेसल (लार्ज) जहाजों की श्रृंखला का चौथा और अंतिम पोत है। इस परियोजना का अनुबंध वर्ष 2018 में किया गया था। संशोधक को भी 30 मार्च 2026 को कोलकाता में निर्मित कर नौसेना को सौंपा गया। इस श्रेणी के जहाज समुद्री सर्वेक्षण, नौवहन चार्ट तैयार करने तथा समुद्र तल से संबंधित आंकड़ों के संग्रहण में उपयोग किए जाते हैं। इनके द्वारा प्राप्त जानकारी नौसेना संचालन, समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट
अग्रय अपनी श्रेणी का चौथा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट है, जिसे 30 मार्च 2026 को नौसेना को सौंपा गया। वहीं मालवन का नौसेना में औपचारिक शामिल होना 31 मार्च 2026 को कोच्चि में हुआ। इसका निर्माण Cochin Shipyard Limited द्वारा किया गया है। ये पोत तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों तथा अन्य जलमग्न खतरों का पता लगाने और उनसे मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हैं। आधुनिक सेंसर और युद्धक प्रणालियों से लैस ये पोत भारत की तटीय सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे।
आत्मनिर्भर भारत और नौसेना की भविष्य योजना
इन नए प्लेटफॉर्मों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत से अधिक तक है। भारतीय नौसेना ने इन जहाजों के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत अभियान और वर्ष 2047 तक पूर्ण नौसैनिक आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से जोड़ा है। नौसेना की दीर्घकालिक योजना के अनुसार वर्ष 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों का संचालन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम देश की सामरिक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट नीलगिरि श्रेणी के आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत हैं।
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स कोलकाता स्थित प्रमुख रक्षा शिपयार्ड है।
- कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड कोच्चि में स्थित भारत का प्रमुख जहाज निर्माण केंद्र है।
- सर्वे वेसल (लार्ज) समुद्री सर्वेक्षण, चार्ट निर्माण और समुद्र तल के अध्ययन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- भारतीय नौसेना वर्ष 2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों का बेड़ा संचालित करने की योजना बना रही है।
भारतीय नौसेना में इन पांच स्वदेशी प्लेटफॉर्मों का शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आधुनिक तकनीक, उच्च स्वदेशीकरण और उन्नत युद्धक क्षमताओं से लैस ये पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।