भारतीय नौसेना को मिलेंगे आठ नए स्वदेशी कोरवेट
भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए आठ अगली पीढ़ी के कोरवेट बनाए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने 2 नवंबर 2026 को इनके निर्माण के लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ कुल 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध किए। नौसेना इन युद्धपोतों का डिजाइन स्वदेशी रूप से तैयार करेगी।
जीआरएसई और जीएसएल में बंटा निर्माण कार्य
अनुबंध के तहत जीआरएसई पांच कोरवेट बनाएगा, जबकि जीएसएल तीन पोतों का निर्माण करेगा। दोनों रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। परियोजना को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 28 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दी थी। अनुबंधों पर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
नौसेना की ओर से डिजाइन तैयार किए जाने से पोतों की रूपरेखा और उनकी परिचालन आवश्यकताओं को भारतीय जरूरतों के अनुरूप रखा जा सकेगा। निर्माण का जिम्मा दो अलग-अलग शिपयार्डों को देने से परियोजना में देश के जहाज निर्माण क्षेत्र की क्षमता का उपयोग होगा।
बहुआयामी समुद्री अभियानों के लिए क्षमता
इन कोरवेट में उन्नत मिसाइलें, हथियार प्रणालियां और सेंसर लगाए जाएंगे। इन्हें वायु, सतह और पानी के नीचे के क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। इनके नियोजित कार्यों में सतह-विरोधी और पनडुब्बी-विरोधी युद्ध, तटीय रक्षा, तट के निकट समुद्री अभियान, निगरानी तथा समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा शामिल है।
कोरवेट का अपेक्षाकृत छोटा आकार और तटीय क्षेत्रों में संचालन की उपयोगिता उन्हें समुद्र के सीमित और उथले हिस्सों में अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। इस परियोजना के पोत भारत की समुद्री सुरक्षा संबंधी जरूरतों के लिए बनाए जाएंगे; हालांकि उनकी विशिष्ट तैनाती और तकनीकी विवरणों की जानकारी यहां निर्धारित नहीं की गई है।
जहाज निर्माण और सहायक उद्योगों को मिलेगा काम
परियोजना से अगले दस वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव-दिवस रोजगार और सहायक उद्योगों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में करीब 460 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है। मानव-दिवस का अर्थ है एक व्यक्ति के एक दिन के काम की इकाई। युद्धपोत निर्माण में मुख्य शिपयार्ड के साथ कई सहायक इकाइयों की भागीदारी होती है, इसलिए इस परियोजना का रोजगार प्रभाव आपूर्ति-श्रृंखला तक पहुंचने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तट के निकट समुद्री क्षेत्र में किए जाने वाले अभियानों को तटीय या लिटोरल अभियान कहा जाता है।
- फ्रिगेट सामान्यतः अधिक सहनशक्ति और समुद्र में लंबे समय तक संचालन की क्षमता के कारण खुले समुद्र के अभियानों के लिए उपयुक्त होते हैं।
- खींचकर चलाए जाने वाले सोनार में जलध्वनि संवेदकों को जहाज के पीछे रखा जाता है, जिससे जहाज के अपने शोर से दूरी बनती है और निष्क्रिय तरीके से पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
- खंड-आधारित जहाज निर्माण में बड़े ढांचे के हिस्से अलग-अलग बनाए जाते हैं और बाद में क्रम से जोड़कर जहाज तैयार किया जाता है।
स्वदेशी डिजाइन और देश के दो शिपयार्डों में निर्माण वाली यह परियोजना नौसेना की परिचालन जरूरतों के साथ-साथ भारत के जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी विस्तार देगी।