वायुसेना की नई प्राथमिकताएं: तैयारी, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियान

वायुसेना की नई प्राथमिकताएं: तैयारी, आत्मनिर्भरता और संयुक्त अभियान

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय वायुसेना के 29वें वायुसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। एक नवंबर को दीक्षित ने वायुसेना की प्राथमिकताओं को ‘वायु’ नाम से सामने रखा। इसमें सतर्कता और तैयारी, आत्मनिर्भरता, युक्ति तथा संयुक्त प्रयास के चार स्तंभ शामिल हैं।

‘वायु’ के चार स्तंभों पर जोर

सतर्कता और तैयारी के तहत लड़ाकू स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाइयों और कर्मियों को किसी भी स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रखना शामिल है। दीक्षित ने वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को स्वीकृत स्तर तक बहाल करने को भी प्राथमिकता बताया। यह लक्ष्य इसलिए अहम है क्योंकि प्रभावी हवाई सुरक्षा के लिए तैयार विमानों के साथ प्रशिक्षित कर्मियों और निगरानी प्रणालियों का तालमेल जरूरी होता है।

आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में स्वदेशी विमान, सेंसर और हथियारों की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान रहेगा। इसमें तेजस एमके-1ए और एमके-2 के साथ उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) शामिल हैं। युक्ति का अर्थ सिद्धांतों, प्रक्रियाओं और तकनीक में नए विचारों को अपनाना है। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम नेटवर्क आधारित कमान एवं नियंत्रण, ड्रोन-रोधी रक्षा और निकट-अंतरिक्ष को परिचालन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।

युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए तैयारी

दीक्षित के अनुसार ड्रोन, लंबी दूरी के सटीक हथियार, अंतरिक्ष और साइबर क्षमताएं युद्ध के स्वरूप को बदल रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र भी आधुनिक सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे माहौल में केवल विमान और हथियार पर्याप्त नहीं हैं; सूचना का तेज आदान-प्रदान, नेटवर्क की सुरक्षा और बदलते खतरों के अनुरूप संचालन भी आवश्यक है।

इसलिए वायुसेना की तैयारी में तकनीकी नवाचार और परिचालन प्रक्रियाओं के विकास का महत्व बढ़ता है। ड्रोन जैसे छोटे और कम लागत वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए कई स्तरों वाली रक्षा व्यवस्था जरूरी हो सकती है। निकट-अंतरिक्ष को परिचालन क्षेत्र मानने का उल्लेख भी बदलती सुरक्षा आवश्यकताओं के संदर्भ में किया गया है।

तीनों सेनाओं के बीच तालमेल

‘वायु’ का चौथा स्तंभ संयुक्त प्रयास है। इसके तहत सेना, नौसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ योजना बनाने तथा अभियान चलाने पर बल दिया गया है। आधुनिक सैन्य अभियानों में अलग-अलग बलों की क्षमताओं को जोड़ना और साझा जानकारी के आधार पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण है। संयुक्त योजना से वायुसेना की कार्रवाई अन्य सैन्य और राष्ट्रीय प्रयासों के साथ बेहतर तालमेल में हो सकती है।

दीक्षित 1986 में लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन हुए थे और वायुसेना के उप-प्रमुख के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में घोषित प्राथमिकताएं परिचालन तैयारी के साथ स्वदेशी विकास, नई तकनीकों और अंतर-सेवा समन्वय को जोड़ती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

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  • तेजस में भारत में विकसित चौगुना डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर उड़ान नियंत्रण प्रणाली का उपयोग होता है।
  • तेजस एमके-1ए में सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन की जाने वाली सारणी (एईएसए) रडार, आत्म-सुरक्षा जैमर और रडार चेतावनी रिसीवर शामिल हैं। यह बाहरी इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोधी पॉड भी ले जा सकता है।
  • एएमसीए का रूपांकन कम रडार पहचान और सुपरसोनिक गति पर बिना आफ्टरबर्नर उड़ान की क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है।
  • एएमसीए के नियोजित पांच प्रोटोटाइप में पहले तीन विकासात्मक उड़ान परीक्षणों और शेष दो हथियार परीक्षणों पर केंद्रित होंगे।

‘वायु’ प्राथमिकताएं वायुसेना की पारंपरिक तैयारी को स्वदेशी तकनीक, नवाचार और संयुक्त अभियानों की जरूरतों से जोड़ती हैं।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

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