बीएसई पर एनएसई की लिस्टिंग से भारतीय पूंजी बाजार में नया अध्याय
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) की 24 सितंबर 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजारों के लिए एक अहम घटना बन गई। शेयर 1,800 रुपये प्रति शेयर पर खुले, जबकि इश्यू प्राइस 1,785 रुपये था। इस लिस्टिंग के साथ एनएसई का मूल्यांकन 4.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया।
एनएसई की लिस्टिंग क्यों रही खास
यह लिस्टिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में से एक ने खुद एक सूचीबद्ध कंपनी का रूप लिया। एनएसई की लिस्टिंग ने बाजार ढांचे, पारदर्शिता और कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से भी ध्यान खींचा। इससे यह संकेत मिला कि देश का वित्तीय बाजार अब अधिक परिपक्व और संस्थागत रूप से मजबूत हो रहा है।
एनएसई की सार्वजनिक पेशकश ऑफर फॉर सेल के रूप में आई, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों ने 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बेचे। इस तरह की पेशकश में कंपनी को सीधे कोई राशि नहीं मिलती, बल्कि बिक्री से प्राप्त धन शेयर बेचने वाले निवेशकों को जाता है।
सब्सक्रिप्शन और निवेशकों की प्रतिक्रिया
एनएसई का आईपीओ 21 सितंबर 2026 को बंद हुआ और इसका आकार 22,562 करोड़ रुपये रहा। कुल मिलाकर इसे 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। अलग-अलग निवेशक वर्गों की भागीदारी भी मजबूत रही।
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन दिया।
- नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने 6.55 गुना बोली लगाई।
- रिटेल निवेशकों की ओर से 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज हुआ।
यह आंकड़े बताते हैं कि संस्थागत निवेशकों ने इस इश्यू में खास दिलचस्पी दिखाई, जबकि खुदरा निवेशकों की भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित रही।
नियामकीय ढांचा और बाजार पर असर
भारत में स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन की संरचना सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) (स्टॉक एक्सचेंजेज एंड क्लियरिंग कॉरपोरेशन) रेगुलेशंस, 2019 के तहत नियंत्रित होती है। इन नियमों के अनुसार, किसी एक्सचेंज को अपनी ही शेयर लिस्टिंग से बचना होता है ताकि हितों के टकराव की स्थिति न बने। इसी वजह से एनएसई की लिस्टिंग बीएसई पर हुई।
इस कदम के बाद एनएसई, बीएसई के बाद भारत का दूसरा सूचीबद्ध स्टॉक एक्सचेंज बन गया। बीएसई की स्थापना 1875 में हुई थी और इसे एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज माना जाता है। वहीं एनएसई की स्थापना 1992 में हुई और इसने भारत में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बीएसई की स्थापना 1875 में हुई थी और यह एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।
- एनएसई की स्थापना 1992 में हुई थी और इसने भारत में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग को लोकप्रिय बनाया।
- ऑफर फॉर सेल में कंपनी को नई पूंजी नहीं मिलती; राशि मौजूदा शेयरधारकों को जाती है।
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स में म्यूचुअल फंड, बैंक, बीमा कंपनियां और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक शामिल होते हैं।
एनएसई की यह लिस्टिंग भारतीय बाजारों के विकास, नियामकीय मजबूती और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का संकेत देती है। यह घटना आने वाले समय में एक्सचेंजों की भूमिका और बाजार संरचना को लेकर नई चर्चा भी आगे बढ़ा सकती है।