‘मेड इन इंडिया’ से आगे ‘इमैजिन्ड इन इंडिया’ की ओर आर्थिक सोच
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन के 53वें राष्ट्रीय प्रबंधन सम्मेलन में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नए दृष्टिकोण की बात की। उन्होंने कहा कि अब समय केवल ‘मेड इन इंडिया’ तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ‘इमैजिन्ड इन इंडिया’ की दिशा में बढ़ने का है। इसका अर्थ है ऐसे उत्पाद और समाधान, जो भारत में ही सोचे जाएं, डिजाइन हों, तकनीकी रूप से विकसित हों और बाद में वैश्विक बाजार तक पहुंचें।
‘इमैजिन्ड इन इंडिया’ का मतलब क्या है
यह विचार केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, डिजाइन, इंजीनियरिंग और बौद्धिक संपदा निर्माण पर जोर देता है। यानी भारत को सिर्फ निर्माण केंद्र नहीं, बल्कि विचार, तकनीक और उत्पाद-निर्माण की शुरुआती कड़ी भी बनना होगा। यह बदलाव भारतीय उद्योगों को अधिक मूल्यवर्धन, बेहतर प्रतिस्पर्धा और वैश्विक पहचान दिला सकता है।
आरएंडडी पर अधिक निवेश की जरूरत
वित्त मंत्री ने कॉरपोरेट क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास पर अधिक खर्च करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने इन-हाउस रिसर्च ढांचे को मजबूत करना चाहिए और विश्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए। भारत का Gross Expenditure on R&D अभी GDP का 0.83% है, जबकि OECD औसत 2.7%, चीन 2.6% और अमेरिका 3.5% GDP खर्च करता है। यह अंतर बताता है कि भारत को तकनीकी नवाचार में अभी लंबी दूरी तय करनी है।
व्यवसाय संरचना और बाजार की प्राथमिकताएं
सीतारमण ने पारिवारिक व्यवसायों में पेशेवर प्रबंधन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामित्व और प्रबंधन के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए, ताकि निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सके। साथ ही, उन्होंने उद्योगों से केवल शहरी प्रीमियम उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित न करने की अपील की। कृषि, ग्रामीण निर्माण, परिवहन और असंगठित उद्यमों में भी बड़ी मांग मौजूद है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Gross Expenditure on R&D किसी देश की GDP के अनुपात में अनुसंधान पर होने वाले कुल खर्च का मानक संकेतक है।
- OECD का पूरा नाम Organisation for Economic Co-operation and Development है।
- बौद्धिक संपदा में पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और औद्योगिक डिजाइन शामिल होते हैं।
- ‘विकसित भारत 2047’ भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने से जुड़ा राष्ट्रीय लक्ष्य है।
इस संदेश का सार यह है कि भारत को अब केवल उत्पादन-आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विचार-आधारित और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था बनना होगा। यही बदलाव लंबे समय में भारतीय उद्योगों को अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर प्रभावी बना सकता है।