बाब-अल-मंदेब में नौसेना की निगरानी से समुद्री व्यापार को सुरक्षा

बाब-अल-मंदेब में नौसेना की निगरानी से समुद्री व्यापार को सुरक्षा

लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के बीच भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर निगरानी रखी। इस अभियान में भारतीय ध्वज वाले और विदेशी ध्वज वाले जहाजों के लिए एस्कॉर्ट और सर्विलांस की भूमिका निभाई गई, ताकि खाड़ी-ए-अदन और आसपास के समुद्री मार्गों में वाणिज्यिक नौवहन निर्बाध रह सके।

बाब-अल-मंदेब क्यों है रणनीतिक रूप से अहम

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य यमन को अफ्रीका के हॉर्न में स्थित जिबूती और इरिट्रिया से अलग करता है। यह लाल सागर को खाड़ी-ए-अदन और आगे अरब सागर मार्ग से जोड़ता है। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स में गिना जाता है। तेल, कंटेनर और अन्य आवश्यक माल की बड़ी मात्रा इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर डाल सकती है।

भारतीय नौसेना की हालिया तैनाती और एस्कॉर्ट

25 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना ने एमवी यूनियन मरीनर और एमवी डागर की सुरक्षित ट्रांजिट पर निगरानी रखी। इससे पहले 22 अगस्त 2026 को क्रूड ऑयल टैंकर एमटी सन्मार हेराल्ड को इसी जलमार्ग से एस्कॉर्ट किया गया। 9 से 10 अगस्त 2026 के बीच आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने एमटी कंपास और एमटी थालाटा को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकाला।

आईएनएस त्रिशूल तलवार-श्रेणी की गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है, जबकि आईएनएस आदित्य एक रीप्लेनिशमेंट शिप है। इन जहाजों की तैनाती से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नौसेना केवल युद्धक भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा में भी सक्रिय है।

ऑपरेशन संकल्प और समुद्री सुरक्षा ढांचा

भारतीय नौसेना अक्टूबर 2008 से खाड़ी-ए-अदन में लगातार युद्धपोत तैनात कर रही है। बाद में जून 2019 में शुरू हुआ ऑपरेशन संकल्प इस समुद्री सुरक्षा प्रयास का औपचारिक और व्यापक ढांचा बना। इसके तहत नौसेना, शिपिंग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच समन्वय कर ऊर्जा कार्गो और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित की जाती है।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में समुद्री डकैती, हमले और अपहरण जैसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। 21 अगस्त 2026 को भी यमन और सोमालिया के पास दो वाणिज्यिक जहाजों के अपहरण की खबर आई, जिन पर 22 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। इससे समुद्री मार्गों की सुरक्षा में सतत निगरानी की जरूरत और बढ़ जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और खाड़ी-ए-अदन को जोड़ता है।
  • ऑपरेशन संकल्प जून 2019 में शुरू किया गया था।
  • भारतीय नौसेना खाड़ी-ए-अदन में अक्टूबर 2008 से युद्धपोत तैनात कर रही है।
  • आईएनएस त्रिशूल तलवार-श्रेणी और आईएनएस आदित्य आदित्य-श्रेणी का जहाज है।

बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री चोकपॉइंट्स पर निगरानी केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री स्थिरता से सीधे जुड़ा मुद्दा है। भारतीय नौसेना की यह भूमिका भारत की समुद्री उपस्थिति और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाती है।

Originally written on August 26, 2026 and last modified on August 26, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *