बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद पर मुकाबला, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर चुने गए
बांग्लादेश में 20 अगस्त 2026 को हुए संसदीय मतदान में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए। ढाका स्थित जाटिया संसद के भीतर हुए इस चुनाव में उन्हें 255 वोट मिले, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को 88 वोट प्राप्त हुए। यह चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए 35 साल बाद वास्तविक मुकाबला देखने को मिला।
संसद के भीतर हुआ मतदान और नतीजा
राष्ट्रपति चुनाव स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच हुआ। मतदान प्रक्रिया में तीन पारदर्शी बैलट बॉक्स इस्तेमाल किए गए। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने बताया कि 349 पात्र सांसदों में से 343 ने वैध वोट डाले, जबकि छह सांसद मतदान में शामिल नहीं हुए। यह चुनाव संसद के भीतर संपन्न हुआ, जिससे प्रक्रिया की औपचारिक और संवैधानिक प्रकृति स्पष्ट होती है।
राष्ट्रपति पद की संवैधानिक भूमिका
बांग्लादेश में राष्ट्रपति राज्य प्रमुख होते हैं, लेकिन संसदीय प्रणाली में उनकी भूमिका मुख्यतः औपचारिक होती है। वास्तविक कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास रहती है। राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास और कार्यस्थल ढाका स्थित बंगभवन है, जबकि शपथ ग्रहण समारोह दरबार हॉल में कराया जाता है। इसलिए यह पद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद प्रशासनिक रूप से सीमित अधिकारों वाला माना जाता है।
35 साल बाद प्रतिस्पर्धी चुनाव क्यों अहम है
20 अगस्त 2026 का मतदान इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि 1991 के बाद से बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद आम तौर पर सहमति से भरा जाता रहा था। इससे पहले राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में यह चुनाव केवल सत्ता-परिवर्तन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की संवैधानिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना भी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बांग्लादेश 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद स्वतंत्र देश बना।
- जाटिया संसद बांग्लादेश की एकसदनीय राष्ट्रीय संसद है।
- बंगभवन ढाका में स्थित राष्ट्रपति भवन है और वहीं राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यस्थल भी है।
- बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की स्थापना 1978 में हुई थी।
मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का राष्ट्रपति चुना जाना बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह चुनाव लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी रूप में हुआ।