बहुराज्यीय सहकारी समितियों के ऑडिट में एकरूपता की नई पहल

बहुराज्यीय सहकारी समितियों के ऑडिट में एकरूपता की नई पहल

सहकारी क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को बहुराज्यीय सहकारी समितियों के लेखा-परीक्षक प्रतिवेदन आदेश, 2026 (एमएससीएआरओ) लागू किया। यह आदेश ऐसी समितियों की लेखा-परीक्षा रिपोर्ट के लिए एक समान ढाँचा तय करता है और वित्तीय स्थिति, प्रशासन, संचालन तथा वैधानिक अनुपालन से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप में दर्ज करने की व्यवस्था करता है।

कानूनी आधार और समान रिपोर्टिंग ढाँचा

एमएससीएआरओ, 2026 को बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम की धारा 73(6) के तहत जारी किया गया है। वर्ष 2023 में अधिनियम में किए गए संशोधन ने केंद्र सरकार को इन समितियों के लिए लेखांकन और लेखा-परीक्षा मानक निर्धारित करने का अधिकार दिया था। बहुराज्यीय सहकारी समितियां एक से अधिक राज्यों में काम करती हैं और उनका पंजीकरण तथा संचालन केंद्रीय कानून के तहत होता है।

इस ढाँचे को तैयार करते समय भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और बहुराज्यीय सहकारी समितियों से सुझाव लिए गए। इसकी रूपरेखा कंपनियों पर लागू कंपनी लेखा-परीक्षक प्रतिवेदन आदेश (कारो) से प्रेरित है। लेखा-परीक्षकों को मानकीकृत प्रारूप में स्पष्ट ‘हाँ’ या ‘नहीं’ के उत्तर और आवश्यक टिप्पणियां देनी होंगी।

वित्तीय जोखिम और अनुपालन पर खास निगरानी

रिपोर्ट में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों, बकाया ऋणों, तरलता की स्थिति, जमा, अग्रिम, पुनर्भुगतान में चूक और उधार जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा, लेखा-परीक्षक साइबर सुरक्षा उपायों और धन-शोधन निरोधक नियमों के अनुपालन की भी जाँच करेंगे। इस तरह रिपोर्टिंग केवल वित्तीय खातों तक सीमित न रहकर शासन और वैधानिक जिम्मेदारियों को भी समेटेगी।

समय रहते वित्तीय दबाव और अनियमितताओं की पहचान करना, सदस्यों की धनराशि की सुरक्षा करना और समितियों में वित्तीय अनुशासन मजबूत करना इस व्यवस्था के घोषित उद्देश्य हैं। एकसमान जानकारी से समितियों की स्थिति का आकलन और जोखिम वाले मामलों पर निगरानी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

चरणबद्ध दायरा और डिजिटल निगरानी

वित्त वर्ष 2026–27 से यह व्यवस्था उन बड़ी समितियों पर लागू होगी, जिनकी सकल प्राप्तियां, कुल जमा और उधार, अथवा ऋण एवं अग्रिम निर्धारित ₹1,000 करोड़ की सीमा से अधिक हों। वित्त वर्ष 2028–29 से सीमा घटाकर ₹250 करोड़ करने का प्रावधान है। मंत्रालय का दीर्घकालीन लक्ष्य इसे ₹50 करोड़ से अधिक के वित्तीय मानकों वाली समितियों तक विस्तारित करना है।

मानकीकृत लेखा-परीक्षा जानकारी को केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) पोर्टल से जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित तकनीकी निगरानी में स्वचालित जाँच, नियामकीय डैशबोर्ड, जोखिम-आकलन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण शामिल हैं। रिपोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर केंद्रीय रजिस्ट्रार अधिक जोखिम वाली समितियों की पहचान कर उन पर लक्षित निरीक्षण या अन्य कदम उठा सकेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बहुराज्यीय सहकारी समितियों के पंजीकरण और कामकाज का केंद्रीय कानूनी आधार बहुराज्यीय सहकारी समिति अधिनियम है।
  • एमएससीएआरओ, 2026 का आधार अधिनियम की धारा 73(6) है।
  • कारो कंपनियों के लेखा-परीक्षक प्रतिवेदन से संबंधित आदेश है, जबकि एमएससीएआरओ बहुराज्यीय सहकारी समितियों के लिए बनाया गया है।
  • इस ढाँचे के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से सुझाव लिए गए।

चरणबद्ध सीमा और पोर्टल आधारित निगरानी से सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति पर नियमित नजर रखने तथा जोखिम की पहचान को मजबूत करने की अपेक्षा है।

Originally written on October 15, 2026 and last modified on October 15, 2026.

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