डेटा सेंटर मंजूरियों में बिजली-पानी की उपलब्धता होगी अहम

डेटा सेंटर मंजूरियों में बिजली-पानी की उपलब्धता होगी अहम

नीति आयोग और डेलॉइट इंडिया ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्यों के लिए डेटा सेंटर मूल्यांकन ढांचा जारी किया। इसका उद्देश्य है कि नई परियोजनाओं की मंजूरी बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे की वास्तविक उपलब्धता के आधार पर हो। ढांचा परियोजनाओं से मिलने वाले आर्थिक लाभों की तुलना उन्हें दी जाने वाली सरकारी सहायता से करने की भी सिफारिश करता है।

राज्यों के लिए संसाधन-आधारित कसौटी

नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन ने यह ढांचा जारी किया। इसे नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने तैयार किया है। इसमें राज्यों से कहा गया है कि वे डेटा सेंटर की जरूरतों और स्थानीय संसाधनों का आकलन करके मंजूरी दें। इससे परियोजनाओं की योजना बनाते समय बिजली और पानी पर पड़ने वाले दबाव को ध्यान में रखा जा सकेगा।

ढांचे के अनुसार, राज्यों को अगले 20 से 30 वर्षों के लिए अलग-अलग मौसमों में पानी की उपलब्धता का आकलन करना चाहिए। इस प्रक्रिया में मौजूदा जल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी जरूरी है। यदि किसी परियोजना के लिए विशेष रूप से बिजली ग्रिड की परिसंपत्तियां बनाई जाती हैं, तो उनका खर्च संबंधित विकासकर्ता से लेने की सिफारिश की गई है।

पांच स्तंभों पर होगा परियोजनाओं का मूल्यांकन

इस ढांचे में मूल्यांकन के पांच स्तंभ तय किए गए हैं: बिजली और ऊर्जा, पानी और शीतलन, स्थान चयन और पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक एवं रणनीतिक महत्त्व, तथा नीति, शासन और क्रियान्वयन। इस तरह किसी परियोजना को केवल निवेश या प्रस्तावित क्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि उसके संसाधन उपयोग और व्यापक प्रभाव के आधार पर परखने की बात कही गई है।

राज्य सरकारों की ओर से दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को भी मापने योग्य नतीजों से जोड़ने का सुझाव है। इनमें रोजगार, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, ऊर्जा दक्षता, स्थानीय खरीद और कौशल विकास शामिल हैं। ढांचा डेटा सेंटरों को भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थव्यवस्था के विकास से जुड़ा रणनीतिक बुनियादी ढांचा मानता है।

बढ़ती बिजली मांग के लिए संचालन की तैयारी

20 मेगावाट से अधिक बिजली की जरूरत वाले डेटा सेंटरों के लिए स्वचालित मांग-प्रतिक्रिया व्यवस्था तैयार रखना और राज्य भार प्रेषण केंद्रों के साथ एकीकरण करना सुझाया गया है। राज्य भार प्रेषण केंद्र राज्य की बिजली व्यवस्था के समन्वित संचालन की निगरानी और व्यवस्था करते हैं। मांग-प्रतिक्रिया से बिजली प्रणाली की जरूरतों के अनुरूप खपत का प्रबंधन किया जा सकता है।

अगस्त 2026 में भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.57 गीगावाट थी। 2030 तक इसके 4.5 से 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। देश के डेटा सेंटरों ने 2024 में करीब 13 टेरावाट-घंटे बिजली का उपयोग किया। 2030 तक यह खपत 57 टेरावाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय बिजली मांग का लगभग 1 से 2 प्रतिशत हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डेटा सेंटरों की बिजली खपत का एक प्रमुख उपयोग सर्वर और अन्य उपकरणों को चलाना तथा उन्हें ठंडा रखना है।
  • 20 मेगावाट से अधिक बिजली मांग वाले डेटा सेंटरों के लिए ढांचा स्वचालित मांग-प्रतिक्रिया तैयारी की सिफारिश करता है।
  • राज्य भार प्रेषण केंद्र राज्य की बिजली व्यवस्था के समन्वित संचालन की निगरानी करते हैं।
  • ढांचे में डेटा सेंटर मूल्यांकन के लिए पांच स्तंभ निर्धारित किए गए हैं, जिनमें ऊर्जा, पानी, पर्यावरण और शासन शामिल हैं।

यह ढांचा राज्यों को डेटा सेंटर निवेश और स्थानीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाने की कसौटी देता है। बढ़ती क्षमता के साथ बिजली, पानी और सार्वजनिक हित पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन भी अधिक महत्त्वपूर्ण होगा।

Originally written on October 15, 2026 and last modified on October 15, 2026.

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