नोवा फ्यूजन कैपिटल को आरबीआई की मंजूरी, ईवी वित्तपोषण को मिलेगा बढ़ावा
एस्ट्रानोवा मोबिलिटी की ऋण इकाई नोवा फ्यूजन कैपिटल को 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में काम करने की मंजूरी मिली। नई दिल्ली स्थित कंपनी का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का वित्तपोषण करना है। इसका प्रमुख ध्यान व्यावसायिक इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य पर्यावरण-अनुकूल परिसंपत्तियों पर रहेगा।
एनबीएफसी के रूप में काम करने की मंजूरी
आरबीआई की मंजूरी के बाद नोवा फ्यूजन कैपिटल अब एनबीएफसी के तौर पर ऋण और वित्तीय सेवाएं दे सकेगी। एनबीएफसी ऐसी कंपनियां होती हैं जो ऋण देने, पट्टे पर परिसंपत्ति उपलब्ध कराने या निवेश जैसी वित्तीय गतिविधियों में शामिल होती हैं, लेकिन बैंक नहीं होतीं। इन्हें आरबीआई नियंत्रित करता है।
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए के तहत एनबीएफसी को कारोबार शुरू करने या जारी रखने के लिए आरबीआई से पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना होता है और निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं। एनबीएफसी भुगतान एवं निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं होतीं और अपने नाम से जारी चेक का भुगतान नहीं कर सकतीं। जमा स्वीकार करने का अधिकार भी केवल उन पात्र एनबीएफसी को मिलता है जो आरबीआई की शर्तों का पालन करती हैं।
व्यावसायिक ईवी और जलवायु-अनुकूल परिसंपत्तियों पर जोर
कंपनी ने अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के वित्तपोषण का लक्ष्य रखा है। शुरुआती चरण में 200 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के लिए पूंजी जुटाई जा चुकी है। इसका ध्यान उन व्यावसायिक संचालकों पर रहेगा जो वाहन या अन्य परिसंपत्तियों का उपयोग आजीविका कमाने के लिए करते हैं। कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रद्धा श्रीमल ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को वित्तपोषण का प्रमुख क्षेत्र बताया है।
व्यावसायिक वाहन खरीदने के लिए सीधे ऋण के अलावा पट्टे की सुविधा भी उपयोगी हो सकती है। पट्टे के माध्यम से उपयोगकर्ता को वाहन इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है, जबकि उसे वाहन खरीदने के लिए पूरी राशि एकमुश्त खर्च नहीं करनी पड़ती। इस तरह की वित्तीय सेवाएं उन संचालकों के लिए वाहन तक पहुंच आसान कर सकती हैं जिनकी आय व्यावसायिक उपयोग पर निर्भर है।
ईवी वित्तपोषण में कंपनी का अनुभव
एस्ट्रानोवा मोबिलिटी पांच वर्ष से अधिक समय से इलेक्ट्रिक वाहनों की पट्टे और वित्तपोषण सेवाओं में सक्रिय है। कंपनी के अनुसार, वह अब तक 35,000 से अधिक ईवी परिसंपत्तियां पट्टे पर दे चुकी है, जिनका मूल्य 450 करोड़ रुपये से अधिक है। संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुणाल मुंद्रा ने भारत में व्यावसायिक वाहनों को इलेक्ट्रिक बनाने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की वित्तपोषण आवश्यकता का अनुमान जताया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी।
- आरबीआई ने 1 अप्रैल 1935 को अपना कामकाज शुरू किया था।
- एनबीएफसी आरबीआई के नियमन के अधीन होती हैं, लेकिन वे बैंक नहीं होतीं।
- प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां किसी वित्तीय संस्था द्वारा प्रबंधित परिसंपत्तियों के कुल मूल्य को दर्शाती हैं।
आरबीआई की मंजूरी नोवा फ्यूजन कैपिटल को अपने वित्तपोषण लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आधार देती है। व्यावसायिक ईवी पर इसका जोर भारत में इलेक्ट्रिक परिवहन की ओर बढ़ते बदलाव के लिए पूंजी उपलब्ध कराने की कोशिश का हिस्सा है।