फोनपे ने Visa के साथ डिजिटल भुगतान को बनाया और सुरक्षित
फोनपे और वीजा ने मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान तीन नई भुगतान सेवाओं की घोषणा की। इनमें टैप टू पे, क्रॉस बॉर्डर स्कैन टू पे और स्मार्ट एक्सेप्ट शामिल हैं। इन सेवाओं के साथ फोनपे भारत का पहला ऐप बन गया है, जो उपभोक्ताओं के लिए वीजा की तीनों प्रमुख क्षमताओं को एक साथ सपोर्ट करता है।
टैप टू पे से कॉन्टैक्टलेस भुगतान को बढ़ावा
टैप टू पे फीचर एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। इसके तहत फोनपे ऐप में वीजा कार्ड टोकनाइज़ेशन की सुविधा मिलती है, जिससे उपयोगकर्ता कॉन्टैक्टलेस तरीके से पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल पर भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा खास तौर पर उन जगहों पर उपयोगी है, जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होती है, क्योंकि लेनदेन डिवाइस में सुरक्षित टोकनाइज़्ड कार्ड क्रेडेंशियल्स के जरिए होता है।
यह फीचर फरवरी 2025 में फोनपे प्लेटफॉर्म पर शुरू की गई वीजा डिवाइस टोकनाइज़ेशन व्यवस्था से जुड़ा है। टोकनाइज़ेशन का उद्देश्य कार्ड की संवेदनशील जानकारी को एक सुरक्षित टोकन से बदलना है, ताकि डिजिटल भुगतान अधिक सुरक्षित हो सके।
विदेशी यात्रियों और छोटे कारोबारियों के लिए नई सुविधा
क्रॉस बॉर्डर स्कैन टू पे फीचर भारतीय यात्रियों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए वे वीजा-सपोर्टेड क्यूआर कोड वाले 14 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भुगतान कर सकेंगे। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। यह सुविधा विदेश यात्रा के दौरान डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
दूसरी ओर, स्मार्ट एक्सेप्ट छोटे व्यापारियों और माइक्रो-व्यापारियों के लिए एक समाधान है। इसकी मदद से वे बिना किसी भौतिक पॉइंट-ऑफ-सेल मशीन के, सिर्फ स्मार्टफोन पर कार्ड भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। इससे छोटे दुकानदारों के लिए डिजिटल भुगतान अपनाना आसान हो सकता है।
फोनपे नेटवर्क और भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र में इसकी भूमिका
फोनपे ने जुलाई 2026 तक 71.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और 5 करोड़ से अधिक व्यापारियों का आधार होने की जानकारी दी। यह आंकड़ा भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में इसकी मजबूत मौजूदगी को दिखाता है।
भारत में खुदरा भुगतान के लिए यूपीआई, कार्ड नेटवर्क, क्यूआर कोड और मोबाइल वॉलेट जैसे कई माध्यम इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में फोनपे और वीजा की यह साझेदारी उपभोक्ताओं, व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों—तीनों के लिए भुगतान अनुभव को अधिक सहज, सुरक्षित और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- टोकनाइज़ेशन में असली कार्ड विवरण की जगह एक सुरक्षित टोकन का उपयोग किया जाता है।
- पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल का इस्तेमाल भौतिक दुकानों पर कार्ड भुगतान स्वीकार करने के लिए होता है।
- क्यूआर कोड आधारित भुगतान भारत में यूपीआई इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं।
- माइक्रो-व्यापारी वे छोटे विक्रेता होते हैं, जो कम लागत वाले डिजिटल भुगतान साधनों का उपयोग करते हैं।
इस साझेदारी से साफ है कि भारत का डिजिटल भुगतान ढांचा अब सिर्फ घरेलू लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय उपयोग और छोटे कारोबारियों की पहुंच—तीनों मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है।