प्री-प्राइमरी शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल
14 अप्रैल 2026 को Supreme Court of India ने केंद्र और राज्य सरकारों से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या प्री-प्राइमरी स्तर पर मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जा सकती है। यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने और प्रारंभिक बाल शिक्षा को शिक्षा के अधिकार के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। यह मुद्दा देश में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।
अनुच्छेद 21A के दायरे को बढ़ाने की मांग
याचिका में यह आग्रह किया गया कि संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत मिलने वाले शिक्षा के मौलिक अधिकार में प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी शामिल किया जाए। वर्तमान में यह अनुच्छेद 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करता है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक शिक्षा सीखने की नींव होती है, इसलिए इसे भी समान संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए।
सरकारी स्कूलों में मौजूद कमियां
याचिका में यह भी बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत से अधिक और शहरी क्षेत्रों में लगभग 30 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। हालांकि, इन स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे की कमजोर स्थिति और डिजिटल संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी समस्याएं मौजूद हैं। इन कमियों का सबसे अधिक असर वंचित और कमजोर वर्गों के बच्चों पर पड़ता है, जिससे शिक्षा में असमानता बढ़ती है।
निगरानी और जवाबदेही की मांग
याचिका में एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र या न्यायालय की देखरेख में एक समिति बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें शिक्षा विशेषज्ञों और NCERT के प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि प्री-प्राइमरी शिक्षा से जुड़ी नीतियों का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके और सरकारी स्कूलों की खामियों को दूर किया जा सके।
प्रारंभिक शिक्षा पर न्यायिक ध्यान
यह मामला दर्शाता है कि न्यायपालिका अब प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे रही है। अगर प्री-प्राइमरी शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता मिलती है, तो यह भारत की शिक्षा नीति और ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार होगा, बल्कि सामाजिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर जोर दिया गया है।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 अनुच्छेद 21A को लागू करता है, लेकिन इसमें प्री-प्राइमरी शिक्षा शामिल नहीं है।
- NCERT भारत में पाठ्यक्रम निर्माण और शैक्षणिक मार्गदर्शन की प्रमुख संस्था है।
अंततः, यह पहल भारत में शिक्षा के प्रारंभिक स्तर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, जो भविष्य में अधिक समावेशी और प्रभावी शिक्षा प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करेगी।