प्रख्यात कैंसर वैज्ञानिक प्रोफेसर रिचर्ड स्कोलियर का निधन
ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध कैंसर शोधकर्ता और पैथोलॉजिस्ट प्रोफेसर रिचर्ड स्कोलियर का 7 जून 2026 को 59 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे मेलेनोमा कैंसर पर अपने महत्वपूर्ण शोध कार्यों के लिए विश्वभर में जाने जाते थे। इसके अलावा, उन्होंने अपने ऊपर एक प्रयोगात्मक इम्यूनोथेरेपी उपचार का उपयोग कर चिकित्सा विज्ञान में एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। वर्ष 2023 में उन्हें ग्लियोब्लास्टोमा नामक अत्यंत आक्रामक मस्तिष्क कैंसर का पता चला था, जिसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अपने उपचार की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की।
ग्लियोब्लास्टोमा से संघर्ष
मई 2023 में प्रोफेसर स्कोलियर को ग्लियोब्लास्टोमा का निदान हुआ था। यह मस्तिष्क का एक अत्यंत तेजी से बढ़ने वाला और घातक कैंसर माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ट्यूमर ग्रेडिंग प्रणाली में इसे ग्रेड-4 श्रेणी में रखा जाता है, जो सबसे गंभीर स्तर है। निदान के समय चिकित्सकों ने उन्हें लगभग छह से आठ महीने का जीवनकाल बताया था। इसके बावजूद उन्होंने नवीन उपचार पद्धतियों को अपनाकर चिकित्सा जगत का ध्यान आकर्षित किया। उनका उपचार शल्य चिकित्सा से पहले इम्यूनोथेरेपी और उसके बाद व्यक्तिगत रूप से तैयार किए गए वैक्सीन के संयोजन पर आधारित था।
इम्यूनोथेरेपी अनुसंधान में योगदान
इम्यूनोथेरेपी कैंसर उपचार की ऐसी विधि है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध सक्रिय किया जाता है। प्रोफेसर स्कोलियर ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और मेलेनोमा कैंसर के उपचार में नई संभावनाएं विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने प्रोफेसर जॉर्जिना लॉन्ग के साथ मिलकर उन्नत मेलेनोमा के उपचार में इम्यूनोथेरेपी के उपयोग को बढ़ावा दिया। उनके शोध ने दुनिया भर में कैंसर उपचार की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अनेक रोगियों को नई आशा प्रदान की।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
मेलेनोमा अनुसंधान में असाधारण योगदान के लिए प्रोफेसर रिचर्ड स्कोलियर और प्रोफेसर जॉर्जिना लॉन्ग को संयुक्त रूप से वर्ष 2024 का “ऑस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर” सम्मान प्रदान किया गया था। यह ऑस्ट्रेलिया के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक माना जाता है। उनके निधन के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने उनके सम्मान में राजकीय अंतिम संस्कार की घोषणा की। यह उनके वैज्ञानिक योगदान और समाज पर पड़े गहरे प्रभाव का प्रमाण माना जा रहा है।
शोध की विरासत और भविष्य
प्रोफेसर स्कोलियर के उपचार अनुभव ने चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा दी है। उनके मामले पर आधारित एक क्लिनिकल परीक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय में शुरू किया गया है। उन्होंने अपने कैंसर संघर्ष को सार्वजनिक रूप से साझा करके न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया, बल्कि कैंसर रोगियों और उनके परिवारों में जागरूकता भी बढ़ाई। उनके निधन के बाद जारी एक खुले पत्र में उनके परिवार ने ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों द्वारा दिए गए समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” ग्लियोब्लास्टोमा वयस्कों में पाए जाने वाले सबसे आक्रामक प्राथमिक मस्तिष्क कैंसरों में से एक है। ” विश्व स्वास्थ्य संगठन की ट्यूमर ग्रेडिंग प्रणाली में ग्रेड-4 सबसे उच्च और गंभीर श्रेणी मानी जाती है। ” इम्यूनोथेरेपी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए किया जाता है। ” “ऑस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर” ऑस्ट्रेलिया का एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। प्रोफेसर रिचर्ड स्कोलियर का जीवन विज्ञान, साहस और मानव सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण रहा। उन्होंने न केवल कैंसर अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान दिया, बल्कि अपनी व्यक्तिगत बीमारी को भी वैज्ञानिक प्रगति के अवसर में बदल दिया। उनका कार्य आने वाले वर्षों में कैंसर उपचार और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में नई राह दिखाता रहेगा।