पीएम-विकसित भारत रोजगार योजना के तहत 2,400 करोड़ रुपये जारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत 2,400 करोड़ रुपये की राशि जारी की। यह धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 15 लाख से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई। लाभार्थियों में पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी और नए रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ता दोनों शामिल हैं। यह योजना देश में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
क्या है प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना?
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) एक रोजगार सृजन कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत अगस्त 2025 में की गई थी। इस योजना का लक्ष्य दो वर्षों के भीतर 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों का सृजन करना है। योजना के लिए कुल 99,446 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को औपचारिक रोजगार उपलब्ध कराना, सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाना और उद्योगों को नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहित करना है।
कर्मचारियों और नियोक्ताओं को मिलने वाले लाभ
योजना के तहत पहली बार औपचारिक क्षेत्र में नौकरी प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इससे युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरणा मिलती है और वे संगठित क्षेत्र से जुड़ने के लिए उत्साहित होते हैं। दूसरी ओर, ऐसे नियोक्ताओं को भी लाभ दिया जाता है जो अतिरिक्त रोजगार सृजित करते हैं। प्रत्येक नए कर्मचारी की नियुक्ति पर नियोक्ता को प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों और व्यवसायों को अधिक लोगों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित करना है।
रोजगार सृजन में योजना की उपलब्धियां
अगस्त 2025 से लेकर जून 2026 तक इस योजना के तहत देशभर में 70 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए जा चुके हैं। इनमें 63 लाख से अधिक ऐसे युवा शामिल हैं जिन्होंने पहली बार औपचारिक कार्यबल में प्रवेश किया है। विशेष रूप से उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इन नए कर्मचारियों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे महिला रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है।
छोटे उद्यमों को मिला बड़ा सहारा
पीएम-वीबीआरवाई योजना का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाले 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठानों में 25 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अलावा लगभग 20 लाख युवाओं ने अपनी पहली नौकरी में छह महीने का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इनमें से लगभग 10 लाख युवाओं को इस उपलब्धि के बाद प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा चुकी है। यह दर्शाता है कि योजना रोजगार सृजन के साथ-साथ रोजगार की स्थिरता को भी प्रोत्साहित कर रही है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की भूमिका
योजना के तहत सभी भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) प्रणाली के माध्यम से किए जाते हैं। इस प्रणाली में सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है। डीबीटी व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की शुरुआत अगस्त 2025 में की गई थी।
- योजना का लक्ष्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार अवसरों का सृजन करना है।
- इस योजना का कुल बजट प्रावधान 99,446 करोड़ रुपये है।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जाते हैं।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना देश में रोजगार सृजन और औपचारिक कार्यबल के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को प्रोत्साहन प्रदान करने वाली यह योजना युवाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न कर रही है तथा छोटे और मध्यम उद्यमों को भी विकास का नया आधार दे रही है। यदि यह गति जारी रहती है, तो योजना अपने निर्धारित रोजगार लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।