पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े पर अमेरिकी पैकेज से भारत की चिंता

पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े पर अमेरिकी पैकेज से भारत की चिंता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के सेबू में अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बातचीत में पाकिस्तान के एफ-16 विमानों के लिए प्रस्तावित अमेरिकी सहायता पैकेज पर भारत की आपत्तियां रखीं। यह बैठक आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के इतर हुई। भारत की चिंता है कि विमान बेड़े के आधुनिकीकरण और संचालन अवधि बढ़ाने के नाम पर दी जा रही तकनीक का इस्तेमाल उसके विरुद्ध हो सकता है।

पैकेज का उद्देश्य और प्रमुख हिस्से

अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने दिसंबर 2025 में इस पैकेज की सूचना दी थी। इसकी कीमत अलग-अलग रिपोर्टों में लगभग 686 मिलियन और 649 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताई गई है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े की संचालन अवधि को 2040 तक बनाए रखना है।

पैकेज में विमानन प्रणालियों का उन्नयन, कूटलेखन प्रणालियां, संबंधित सॉफ्टवेयर, कल-पुर्जे, सिम्युलेटर, प्रशिक्षण और रसद सहायता शामिल हैं। इसमें एएन/एपीएक्स-126 पहचान प्रणाली भी है। पहचान मित्र या शत्रु प्रणाली विमान की पहचान करने और उसे मित्र विमान से अलग समझने में मदद करती है। लिंक-16 सैन्य मंचों के बीच सामरिक सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रणाली है।

भारत की सुरक्षा संबंधी आपत्तियां

भारत का कहना है कि आतंकवाद-रोधी उद्देश्यों और विमान रखरखाव के लिए बताया गया पैकेज पाकिस्तान को भारत के खिलाफ एफ-16 विमानों का उपयोग करने से नहीं रोकता। इस संदर्भ में भारत ने 2019 में बालाकोट हवाई हमले के बाद हुई हवाई मुठभेड़ और पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी मूल के एफ-16 विमानों के पूर्व इस्तेमाल का उल्लेख किया।

नई और उन्नत अमेरिकी तकनीक के तीसरे पक्ष तक पहुंचने की आशंका भी भारत की चिंता का हिस्सा है। यह मुद्दा पाकिस्तान और चीन के बीच सैन्य सहयोग के संदर्भ में उठाया गया। बातचीत में सिंह ने उन देशों के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ अपनाने की मांग की, जो आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण या वित्तीय मदद देते हैं।

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय मंच

दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी और 2025 में हस्ताक्षरित दस वर्षीय रक्षा रूपरेखा की भी समीक्षा की। इस रूपरेखा का उद्देश्य रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी और सह-उत्पादन को आगे बढ़ाना है। पाकिस्तान के एफ-16 पैकेज पर मतभेद के बावजूद, भारत और अमेरिका के बीच व्यापक रक्षा सहयोग बातचीत का अहम हिस्सा बना हुआ है।

एडीएमएम-प्लस क्षेत्रीय रक्षा मंत्रियों का मंच है। इसकी स्थापना 2010 में हुई थी। इसमें आसियान सदस्य देशों के साथ भारत और अमेरिका सहित आठ संवाद साझेदार शामिल होते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने पाकिस्तान के एफ-16 पैकेज की सूचना दिसंबर 2025 में दी थी।
  • पैकेज का लक्ष्य पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े को 2040 तक संचालन योग्य बनाए रखना है।
  • एडीएमएम-प्लस की स्थापना 2010 में क्षेत्रीय रक्षा संवाद के लिए हुई थी।
  • लिंक-16 सैन्य मंचों के बीच सामरिक सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद करता है।

इस वार्ता से स्पष्ट है कि सैन्य उपकरणों की आपूर्ति के साथ उनके संभावित उपयोग और तकनीक के प्रसार को लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं भी जुड़ी रहती हैं।

Originally written on October 29, 2026 and last modified on October 29, 2026.

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