पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम् अनिवार्य

पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम् अनिवार्य

पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 मई 2026 को राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्देश कक्षाएं शुरू होने से पहले लागू होगा और राज्य के सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों तथा गैर-सहायता प्राप्त मदरसों पर समान रूप से लागू रहेगा। यह निर्णय राज्य के मदरसा शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत जारी किया गया है।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम् भारत का प्रसिद्ध देशभक्ति गीत है, जिसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत उनके उपन्यास आनंदमठ में वर्ष 1882 में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का प्रतीक बन गया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वर्ष 1950 में वंदे मातरम् को भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा।

पश्चिम बंगाल के मदरसा शिक्षा संस्थान

पश्चिम बंगाल में मदरसे राज्य की मदरसा शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होते हैं। इनमें सरकारी मॉडल मदरसे, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे और गैर-सहायता प्राप्त मदरसे शामिल हैं। इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ सामान्य शिक्षा भी दी जाती है। राज्य सरकार समय-समय पर शिक्षा व्यवस्था और प्रार्थना सभा से जुड़े दिशा-निर्देश जारी करती रहती है।

स्कूलों में पहले से लागू व्यवस्था

यह नया आदेश राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पहले जारी किए गए निर्देशों का विस्तार माना जा रहा है। इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूलों में बंगालर माटी बंगालर जल गीत को भी अनिवार्य रूप से गाया जाता था। भारत के अधिकांश विद्यालयों और सरकारी संस्थानों में सुबह की सभा के दौरान जन गण मन का गायन सामान्य परंपरा है। जन गण मन को भी वर्ष 1950 में भारत का राष्ट्रीय गान घोषित किया गया था।

राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक परंपरा

राज्य सरकार का मानना है कि ऐसे गीत विद्यार्थियों में राष्ट्रीय भावना, सांस्कृतिक पहचान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं। वंदे मातरम् का उपयोग लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय आयोजनों में किया जाता रहा है। हालांकि, इस प्रकार के निर्देश कई बार सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय भी बनते हैं, क्योंकि देश के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं शताब्दी में की थी। ” जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गान है और इसे 1950 में अपनाया गया था। ” पश्चिम बंगाल में सरकारी मॉडल, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त मदरसे संचालित होते हैं। ” बंगालर माटी बंगालर जल पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा प्रसिद्ध बंगाली गीत है। पश्चिम बंगाल सरकार का यह निर्णय शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों और देशभक्ति गीतों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भी तेज हो सकती है।

Originally written on May 22, 2026 and last modified on May 22, 2026.

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